कावड़ यात्रा की शुरूआत के है अलग- अलग मत

भगवान परशुराम और भगवान राम ने किया था जलाभिषेक


इंदौर। हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक चतुर्मास में पड़ने वाले श्रावण के महीने में कांवड़ यात्रा का बड़ा महत्व है. माना जाता है कि शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. उन्हें केवल एक लोटा जल चढ़ा कर प्रसन्न किया जा सकता है. वहीं कावड़ यात्रा की शुरूआत को लेकर भी कई लोगों को जानकारी नहीं होती तो आज हम आपकों बताने जा रहे है कि पहली कावड़ा यात्रा की शुरूआत किसने की थी…
भगवान परशुराम ने निकाल थी पहली कावड़ यात्रा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कावड़ यात्रा की शुरुआत सबसे पहले भगवान परशुराम ने की थी. उन्होंने कांवड़ से गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के बागपत के पास बना पुरा महादेव का अभिषेक किया था. भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर से कांवड़ में गंगाजल लेकर आए थे और फिर इस प्राचीन शिवलिंग का अभिषेक किया था. ये परंपरा आज भी चली आ रही है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु गढ़मुक्तेश्वर जो अब ब्रजघाट के नाम से जाना जाता है से गंगाजल लाकर पुरा महादेव का जलाभिषेक करते हैं.

भगवान राम थे पहले कांवड़िए
कुछ प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान राम ने की थी. मर्यादा पुरुषोत्तम ने बिहार राज्य के सुल्तानगंज से अपने कांवड़ में गंगाजल भरकर बाबा धाम के शिवलिंग का जलाभिषेक किया था. यहीं से कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है.

श्रवण कुमार को भी माना जाता है पहले कावड़ यात्री
धार्मिक ग्रंथों के कुछ विद्वानों का मत है कि सबसे पहले त्रेतायुग में श्रवण कुमार ने कांवड़ यात्रा की थी. जब श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा करा रहे थे, तब उनके माता-पिता ने मायापुरी यानी हरिद्वार में गंगा स्नान करने की इच्छा जाहिर की थी. उनकी इच्छा पूर्ति के लिए श्रवण कुमार ने अपने माता पिता को कांवड़ में बैठा कर हरिद्वार में गंगा स्नान कराया और वापस जाते समय गंगाजल लेकर गए यहीं से कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है.

सभी देवों ने किया था महदेव का पहला जलाभिषेक

अन्य प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला था तो उसका पान भगवान शिव ने किया था. जिसकी वजह से उनका कंठ नीला पड़ गया था. इस दौरान सभी देवताओं ने भगवान शिव पर कई पवित्र नदियों का जल अर्पित किया था. साथ ही सभी ने गंगाजल भी चढ़ाया था. यहीं से श्रावण मास में कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है.

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