खजराना गणेश करते है हर मनोकामना पूर्ण

इंदौर। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश हर भक्त की मनोकामना पूर्ण करते है। यहां जो भी भक्त श्रद्धा रख कर पांच बुधवार नियमित दर्शन के लिए आता है उसके सब कृष्ट मिट जाते है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। ज्यादातर बुधवार एवं रविवार को विशाल संख्या मे लोग दर्शन करने के लिए इस मंदिर में आते हैं।
औरंगजेब पहुंचा था तहस नहस करने
ऐसा माना जाता है कि औरंगजेब खजराना गणेश की मुर्ती को नष्ट करना चाहता था। इसकी भनक यहां के भक्तों को लग गई और उन्हौने मुर्ती को छुपाने का निर्णय लेते हुए सभी से छुपा कर एक कुंए में मुर्ती को डाल दिया। इसके बाद एक भक्त के सपने में भगवान खजराना गणेश ने दर्शन दे कर मुर्ती बाहर निकालने को कहा, स्वप्न पर विश्वास करके भक्त ने जब कुंए में खोजा तो उन्है खजरान गणेश की मुर्ती कुंए में पाप्त हुई। उसके बाद भक्त ने एक छोटी झोपड़ी में भगवान को स्थापित करके पूजा पाठ शुरू की। 1735 में इस मंदिर की स्थापना अहिल्याबाई होल्कर द्वारा की गई थी, वर्तमान में एक विशाल मंदिर सबसे प्रतिष्ठित मंदिर के रूप में विकसित है। मंदिर में सोने, हीरे और अन्य बहुमूल्य रत्नों का नियमित दान किया जाता है। गर्भगृह की बाहरी दीवार और चांदी से बनी है और इस पर विभिन्न मनोदशाओं और उत्सवों का चित्रण किया गया है। देवता की आंखें हीरे से बनी हैं जो इंदौर के एक व्यवसायी ने दान में दी थीं। गर्भगृह की ऊपरी दीवार चांदी से बनी है।

नित्य होता भव्य श्रंगार
प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में बुधवार को भगवान गणेश का पंचामृत से अभिषेक कर शुद्ध घी और सिंदूर लगाया जाता है। जिसके बाद भगवान को वस्त्र धारण करवाकर भव्य श्रृंगार कर पुष्प माला अर्पित की जाती है। खजराना गणेश मंदिर की खास बात यह भी यहां अन्न क्षेत्र सुबह और शाम चलता है। जिसमें रोजाना कई भक्त निशुल्क भोजन करते है। मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट के मुताबिक सुबह अन्न क्षेत्र में करीब 1200 लोगों का तो शाम को करीब 500 लोगों का भोजन रोजाना बनाता है। इस भोजन की व्यवस्था मंदिर प्रबंधन समिति और भक्तों द्वारा की जाती है। यहां कई भक्तों को इस योजना में सदस्य बनाया गया है। साथ ही जो अन्न क्षेत्र में लोगों को भोजन करवाना चाहते है वे 2500, 5 हजार और 11 हजार रुपए की राशि देकर भी यहां लोगों को भोजन करा सकते है।
चमत्कारी वृक्ष करता मनोकामना पूर्ण
यहां भगवान शिव और मां दुर्गा के मंदिर सहित छोटे-बड़े कुल 33 मंदिर हैं, जो अनेक देवी-देवताओ को समर्पित हैं। मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह भी मनोकामना पूर्ण करने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *