चातुर्मास, सनातन धर्म में चार महीनों का पवित्र अवधि है जिसका महत्व अत्यंत गहरा है। वेदिक परंपराओं से जुड़ी इस परंपरा में, चातुर्मास देवशयनी एकादशी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से शुरू होता है और प्रबोधिनी एकादशी (कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से समाप्त होता है। यह अवधि आध्यात्मिक प्रथाओं, तपस्या और आत्मविचार के लिए प्रस्तुत है, जो विकास और नवीनता के मूल में आत्मसात करता है।
सनातन धर्म में चातुर्मास का पावन समय आध्यात्मिक अनुशासन, तपस्या और ध्यान का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष, चातुर्मास 17 जुलाई 2024 से प्रारंभ हुआ है और 12 नवंबर 2024 को समाप्त होगा।
इस अवधि में क्या करें:
- तपस्या और व्रत: चातुर्मास में तप, व्रत और आध्यात्मिक अभ्यास करने का विशेष महत्व है। यह समय ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
- ज्ञान और सेवा: शास्त्रों का पठन और धार्मिक सेवाओं में सक्रिय भाग लेना।
- कर्मों का समापन: यदि संभव हो तो इस समय में व्यापारिक गतिविधियों को कम करना या विशेष उत्सवों को स्थगित करना।
इस अवधि में क्या न करें:
- क्रूर्ता और हिंसा: चातुर्मास में अनिष्ट कर्मों, जैसे मांसाहार, शराब पीना और अनैतिक कार्यों से बचना चाहिए।
- अशिष्ट बोलना: अशिष्ट वचनों और व्यवहार से परहेज करना, और अपने विचारों और कार्यों को सात्त्विक बनाए रखना।
चातुर्मास का यह पवित्र समय समाज में धार्मिकता, संस्कृति और आध्यात्मिक समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। यह अवधि विशेष उपास्यता और साधना के लिए अद्वितीय है, जो व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक समृद्धि में मदद करता है।