51 शक्तिपीठ, जहां गिरे थे माता सती के अंग, वहां आज भी जागृत है माता की शक्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के शरीर के 51 अंगों के गिरने की घटनाओं से जुड़े शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ये शक्तिपीठ आज भी श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय हैं। माना जाता है कि ये स्थान माता सती के शरीर के विभिन्न हिस्सों के गिरने पर बने थे, और हर एक शक्तिपीठ देवी की विशिष्टता को प्रकट करता है। आइए, जानते हैं उन 51 शक्तिपीठों के नाम और जहां-जहां माता सती के अंग गिरे थे, उन स्थानों के बारे में।

1. देवी बाहुला (बायां हाथ) – पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के अजेय नदी के पास।

2. मंगल चंद्रिका (दाएं कलाई) – पश्चिम बंगाल के उज्जनि में।

3. भ्रामरी देवी (बायां पैर) – पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी में।

4. जुगाड्या (दाएं पैर का अंगूठा) – पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में।

5. माता कालिका (बाएं पैर का अंगूठा) – पश्चिम बंगाल के कोलकाता के कालीघाट में।

6. महिषमर्दिनी (भ्रूण) – पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में।

7. देवगर्भ (अस्थियां) – पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में।

8. देवी कपालिनी (बायीं एड़ी) – पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में।

9. फुल्लरा (ओष्ठ) – पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में।

10. अवंति (ऊपरी होंठ) – मध्य प्रदेश के उज्जयिनी में, क्षिप्रा नदी तट पर।

11. नंदिनी (गले का हार) – बीरभूम, पश्चिम बंगाल।

12. देवी कुमारी (दायां कंधा) – पश्चिम बंगाल के रत्नाकर नदी के पास।

13. देवी उमा (बायां कंधा) – भारत-नेपाल बॉर्डर पर।

14. कालिका देवी (पैर की हड्डी) – पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में।

15. विमला जी (माथे का मुकुट) – बांग्लादेश के मुर्शिदाबाद जिले में।

16. मां भवानी (दायीं भुजा) – बांग्लादेश के चिट्टागौंग जिले में।

17. सुनंदा (नाक) – बांग्लादेश के बरिसल में।

18. देवोत्सव (बायीं जांघ) – बांग्लादेश के जयंतिया परगना में।

19. महालक्ष्मी देवी (गला) – बांग्लादेश के जैनपुर गांव में।

20. योगेश्वरी (हाथ और पैर) – बांग्लादेश के खुलना जिले में।

21. अर्पण (बाएं पैर की पायल) – बांग्लादेश के भवानीपुर गांव में।

22. इन्द्रक्षी (दाएं पैर की पायल) – श्रीलंका में।

23. मां ललिता (हाथ की अंगुली) – उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में, प्रयाग संगम में।

24. मणकर्णी (कान की मणि) – उत्तर प्रदेश के वाराणसी में।

25. देवी शिवानी (दायां वक्ष) – उत्तर प्रदेश के चित्रकूट रामगिरी में।

26. चूड़ामणि (केश की चूड़ामणि) – उत्तर प्रदेश के वृंदावन में।

27. श्रावणि (पीठ) – तमिलनाडु के भद्रकाली मंदिर में।

28. सावित्री (एड़ी) – हरियाणा के कुरुक्षेत्र में।

29. देवी गायत्री (कलाई) – राजस्थान के अजमेर में।

30. मां काली (बायां नितंब) – मध्य प्रदेश के अमरकंटक में।

31. देवीनर्मदा (दायां नितंब) – मध्य प्रदेश के अमरकंटक में।

32. देवी नारायणी (ऊपरी दाढ़) – तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवंतपुरम मार्ग पर।

33. वाराही (निचली दाढ़) – उत्तर प्रदेश के गोंडा में।

34. श्री सुंदरी (दाएं पैर की पायल) – आंध्र प्रदेश के कुरनूल श्रीशैलम में।

35. चंद्रभागा (अमाशय) – गुजरात के जूनागढ़ जिले में, सोमनाथ मंदिर के पास।

36. भ्रामरी देवी (ठोड़ी) – महाराष्ट्र के नासिक में, गोदावरी घाटी में।

37. राकिनी देवी (गाल) – आंध्र प्रदेश के कोटिलिंग्शेवर मंदिर में।

38. देवी अंबि (बायें पैर की उंगली) – राजस्थान के भरतपुर में।

39. महाशिरा (दोनों घुटने) – नेपाल में, पशुपतिनाथ मंदिर के पास।

40. गण्डकी चंडी (मस्तक) – नेपाल के पोखरा में, मुक्तिनाथ मंदिर के पास।

41. जयदुर्गा (दोनों कान) – कर्नाटका में स्थित इस मंदिर में।

42. कोट्टरी (सिर) – बलूचिस्तान, पाकिस्तान में, हिंगलाज माता के मंदिर में।

43. महिष मर्दिनी (आंखें) – हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में, नैना देवी मंदिर में।

44. देवी अंबिका (जीभ) – हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में।

45. देवी महामाया (गला) – जम्मू और कश्मीर के पहलगाम स्थित अमरनाथ में।

46. त्रिपुरमालिनी (दायां वक्ष) – पंजाब के जालंधर में।

47. माता अंबाजी (ह्रदय) – गुजरात के अंबाजी मंदिर में।

48. मां दाक्षायनी (दायां हाथ) – कैलाश पर्वत के पास, तिब्बत में।

49. देवी विमला (नाभि) – उड़ीसा के भुवनेश्वर में।

50. त्रिपुर सुंदरी (दायां पैर) – त्रिपुरा के माताबढ़ी शिखर उदयपुर में।

51. कामाख्या देवी (योनि) – असम के गुवाहाटी के कामगिरी में, कामाख्या मंदिर में।

ये सभी शक्तिपीठ श्रद्धा और भक्ति के केंद्र हैं, जहाँ पर भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित करने आते हैं और देवी की उपासना करते हैं। हर स्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता अलग है, और ये जगहें हिंदू धर्म के इतिहास, परंपराओं और विश्वासों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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