14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का ऐसा अद्भुत संयोग पूरे 20 वर्षों के बाद बन रहा है. इससे पहले यह महासंयोग 15 जनवरी 2007 को देखने को मिला था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस खास योग में भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की संभावनाएं बढ़ती हैं.
यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं और पौष मास की एकादशी भी इसी दिन है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल होता है कि खिचड़ी दान किया जाए या नहीं, घर में खिचड़ी बनाई जाएं या नहीं
एकादशी व्रत और संक्रांति का संगम
एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन अनाज खाना वर्जित है। खासकर चावल का सेवन, छूना या दान करना भी नहीं करना चाहिए। जब मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ती हैं, तो इस दिन एकादशी का नियम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए खिचड़ी या अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।
नियमों से मुक्त होती हैं शुभ तिथियां
सनातन परंपरा के अनुसार शुभ तिथियां और त्योहार धार्मिक नियमों से मुक्त होते हैं। यही कारण है कि त्योहारों पर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी संदेह के पूरा किया जा सकता है। एकादशी के दिन खिचड़ी खाने या
“दान करने में कोई दोष नहीं है और इसे लेकर दुविधा में रहने की भी जरूरत नहीं” है। इस बारे में पंडित आशीष शर्मा जी बताते है कि हर माह में आने वाली तिथियों के नियम पर विशेष पर्व का संयोग आने का अर्थ यह होता है कि हम तिथियों के नियमों से ऊपर वर्ष में आने वाले एक दिन के त्यौहारो के मनाए। जिसके चलते एकादशी होने के बावजूद मकर संक्राति के संयोग पर खिचड़ी का दान करें और खिंचड़ी घर में बना कर उसका भोग लगाएं। चूंकि एकादशी व्रत करने वाले श्रद्दालु इस दिन व्रत करते है तो वह अवश्य करें उसे खंडित ना करें।
तिल और गुड़ का दान का है विशेष महत्व
इस अवसर पर दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, मकर संक्राति के दिन कच्ची खिचड़ी का दान किया जाता है। एकादशी के दिन चावल के दान करने से कोई पाप नहीं लगता है। इसलिए निश्चित हो कर खिचड़ी का दान करें क्योकि मकर संक्राति वर्ष में एक बार आती है तो उस दिन करने वाले नियमों का पालन करें। मासिक तिथियों के नियमों में शिथिलता अपनाई जाती है। मकर संक्राति के दिन खिचड़ी के स्थान पर तिल, गुड़, फल, दूध, घी, वस्त्र, कंबल या तिल से बनी खिचड़ी का दान किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार तिल का दान विशेष पुण्य देता है और पितृ दोष तथा ग्रह दोष को शांत करने में सहायक होता है।
आध्यात्मिक अनुशासन का करें पालन
यह संयम भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन सिखाता है। इस तरह, व्रत रखने वाले लोग संक्रांति का पुण्य और एकादशी के नियम दोनों का लाभ पा सकते हैं। जो श्रद्धालु मकर संक्रांति का पुण्य और एकादशी का फल दोनों पाना चाहते हैं, उन्हें सुबह पवित्र स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देना, भगवान विष्णु की पूजा करना और फलाहार के साथ व्रत रखना चाहिए।


