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इंदौर के “फाइबर टू सिल्क फैब” में आई पीढ़ियों तक चलने वाली परंपरागत शाही साड़ी

इंदौर(विनोद गोयल)। पारंपरिक डिजाइन जैसे गजराज (हाथी), हिरन, मयूर और राजवाड़ी आकृतियां… ये केवल डिजाइन ही नहीं, भारतीय संस्कृति और शाही परंपरा के वो प्रतीक हैं, जो भारत के पश्चिमी क्षेत्र में स्थिति कच्छ के बुनकरों की कला को दिखाते हैं। कच्छ क्षेत्र की मलबरी सिल्क से बनी पारंपरिक पानेतर घरचोला साड़ी तो अपनी अलग पहचान रखती ही है। इस साड़ी के नेचुरल कलर पर तीन बार और मनचाहा रंग करवाया जा सकता है।
हैंडलूम पर इस खूबसूरत साड़ी को बुना
इसे लेकर कच्छ के अनुभवी कारीगरों के इस काम को लेकर भोला प्रधान आए हैं। बताते हैं कि इस एक साड़ी को तैयार करने में 60 साल पुराने अनुभवी कारीगर 7 से 10 दिन का समय लेते हैं। बेहद सावधानी और बारीकी से हैंडलूम पर इस खूबसूरत साड़ी को बुना जाता है। यह एक ऐसी साड़ी है, जिसे पीढ़ियों तक तक सहेजा जाता है। पानेतर घरचोला साड़ी नेचुरल और असली मलबरी सिल्क पर बनाई जाती है। गुजरात की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली ये साड़ी विशेष अवसरों, खासकर विवाह और पारिवारिक आयोजनों में पहनी जाती है।

“फाइबर टू सिल्क फैब” प्रदर्शनी
इंदौर के बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में चल रही “फाइबर टू सिल्क फैब” प्रदर्शनी में ये एक नहीं, देशभर के 100 से अधिक वीवर्स के डिजाइन मौजूद है। शहर की महिलाओं के लिए लेटेस्ट डिजाइनों और नई वैरायटी में समर और शादियों को देखते हुए कलेक्शन लाया गया है। प्रदर्शनी 16 मार्च तक हर दिन सुबह 11 से रात 9 बजे तक बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स, जंजीरवाला चौराहा, रेस कोर्स रोड, इंदौर में लगी है।

अपने अनूठे शिल्प, रंग और बारीक बुनाई के लिए दुनियाभर में मशहूर कांजीवरम की पारंपरिक साड़ियां लेकर श्री लक्ष्मी सोसायटी सोसाइटी सिल्क बंगलौर के प्रतिनिधि आए हैं। उनके पास सिल्क पर प्योर जरी का काम किए कांजीवरम साड़ी उपलब्ध है, जो एक ही कारीगर के हाथों 3 महीने में तैयार की जाती है। कई साड़ियों में सोने और चांदी के धागों से बुनाई की जाती है और इसकी कीमत भी इसके काम करने पर तय होती है।

गर्मियों में पहनने के लिए सबसे बेहतर
आयोजक आशीष गुप्ता ने बताया कि प्रदर्शनी में सिल्क और कॉटन साड़ी, डिजाइनर ड्रेस, कांजीवरम साड़ी, बनारसी और पटोला साड़ी, एथनिक ड्रेस के साथ सिल्क व कॉटन ड्रेस मटेरियल भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा पंजाबी कॉटन सूट, साड़ी और बेडशीट्स की भी रेंज यहां देखने को मिल जाएगी। यहां खरीदारी करने वालों को विशेष छूट भी दी जा रही है।

गर्मियों के चलते इस बार का खास आकर्षण जयपुर से आया कॉटन का मटेरियल है, जिसे मोहम्मद शोहेब लेकर आए हैं। मल कॉटन पर वेजिटेबल रंगों से डाय कर इसे ब्लॉक प्रिंट से तैयार किया जाता है और ये गर्मियों में पहनने के लिए सबसे बेहतर होता है। कच्छ के रूहान के पास आरी, पेचवर्क, गोटा पट्टी वर्क का काम किए कुशन कवर, बेडशीट, वॉल हैंगिंग, बैग्स और टेबल रनर्स की रेंज है। कर्नाटक से विजय चौधरी मैसूर की मशरूम मोडल सिल्क की रजवाड़े की डिजाइन बनी शादी लेकर आए हैं, जिस 1 साड़ी पर 2 कारीगर 4 महीने काम करके तैयार करते है।

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