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पांच राज्यों में चुनावी बिगुल: बंगाल से तमिलनाडु तक मतदान की तारीखें घोषित, 4 मई को आएंगे नतीजे

दिल्ली।   देश की राजनीति में फिर से चुनावी हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इन पांच राज्यों में कुल 824 सीटों पर मतदान होगा और चुनावी मुकाबले के नतीजे 4 मई को सामने आएंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार शाम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। जैसे ही तारीखों का एलान हुआ, इन राज्यों में राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई।


पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर इस बार दो चरणों में मतदान होगा। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। राज्य में लगभग 7 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें करीब 3.6 करोड़ पुरुष, 3.4 करोड़ महिलाएं और 1402 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं। इसके बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

तमिलनाडु में 234 सीटों पर मुकाबला
तमिलनाडु में 234 सीटों के लिए चुनाव होंगे। यहां करीब 5.6 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 2.7 करोड़ पुरुष, 2.8 करोड़ महिलाएं और 7617 थर्ड जेंडर वोटर शामिल हैं। पिछली बार हुए चुनाव में डीएमके ने 133 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और एम. के. स्टालिन मुख्यमंत्री बने थे।

असम में 126 सीटों पर चुनाव
असम में कुल 126 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्य में करीब 2.4 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ पुरुष और 1.2 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। पिछले चुनाव में एनडीए ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी और हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने थे।

केरल में 140 सीटों पर मतदान
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे। यहां लगभग 2.6 करोड़ मतदाता हैं। पिछली बार एलडीएफ गठबंधन ने 99 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी और पिनराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।

पुडुचेरी में 30 सीटों पर चुनाव
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदान होगा। यहां करीब 9.4 लाख मतदाता हैं। पिछले चुनाव में एनडीए ने 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।
अब इन पांच राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच चुनावी जंग तेज होने वाली है। नेताओं के दौरे, रैलियां और चुनावी वादों का दौर शुरू हो चुका है। पूरे देश की नजर अब इन चुनावों पर टिकी है, क्योंकि 4 मई को आने वाले नतीजे कई बड़े राजनीतिक समीकरण तय कर सकते हैं।

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