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सिंगापुर–लंदन तक गूंजेगा MP का सौर सपना-निवेश आकर्षित करने रोड शो करेगी मोहन सरकार

भोपाल। –  मध्य प्रदेश को सौर ऊर्जा का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब वैश्विक स्तर पर निवेश जुटाने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में इस वर्ष दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में विशेष रोड शो आयोजित किए जाएंगे, जहां निवेशकों के सामने मुरैना-2 सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण परियोजना सहित कई योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।

दरअसल, फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इन प्रस्तावों के अमल में आने पर प्रदेश में लगभग 1.4 लाख रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। सरकार अब इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए निवेशकों से सीधे संवाद कर रही है।

2030 तक आधी बिजली सौर ऊर्जा से
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकता का आधा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। अनुमान है कि उस समय प्रदेश को करीब 40 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत होगी, जिसमें से लगभग 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से तैयार करने की योजना है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें करीब 7 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से मिल रही है।

मुरैना सहित कई जिलों में बड़ी परियोजनाएं
सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए मुरैना जिले में आठ-आठ हजार मेगावाट की दो बड़ी परियोजनाएं स्थापित करने की तैयारी है। इसके अलावा आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर जिलों में कुल साढ़े सात हजार मेगावाट की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं के लिए करीब 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित की जा चुकी है।

हाल ही में गांधीनगर में आयोजित वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा निवेश सम्मेलन में कई बड़ी कंपनियों ने मध्य प्रदेश में निवेश की रुचि दिखाई है। इनमें अवाडा समूह ने पांच हजार करोड़ रुपये और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये के निवेश का संकेत दिया है। वहीं जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की सौर परियोजना पर काम कर रहा है।

सौर ऊर्जा में मध्य प्रदेश की मजबूत पहचान
प्रदेश पहले ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कर चुका है। सांची को प्रदेश की पहली सौर नगरी के रूप में विकसित किया गया है। देश के कुल सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 8.2 प्रतिशत है और इस आधार पर राज्य चौथे स्थान पर है।

प्रदेश में है सबसे बड़े सौलर प्लांट
ओंकारेश्वर में देश का सबसे बड़ा तैरता हुआ सौर संयंत्र स्थापित किया गया है, जबकि रीवा में 750 मेगावाट क्षमता वाला विशाल सौर ऊर्जा संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े एकल स्थल संयंत्रों में शामिल है, जो दिल्ली मेट्रो को भी बिजली उपलब्ध कराता है। इसके अलावा नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बाबई क्षेत्र में 884 एकड़ में ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में उद्योग और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार को भरोसा है कि इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश देश के सौर ऊर्जा मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थान बना सकेगा।

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