वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: महत्व, इतिहास, और मान्यताएं

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, जिसे बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। यह भारत के झारखंड राज्य के देवघर जिले में स्थित है और इसका पौराणिक और धार्मिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। संक्षिप्त इतिहास वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख कई प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता…

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चार महीनों की साधना का आरंभ: देवशयनी एकादशी 2024 का शास्त्रीय महत्व

देवशयनी एकादशी, जिसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसे भगवान विष्णु के शयन करने का दिन माना जाता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 17 जुलाई 2024 को मनाई जाएगी। शास्त्रीय महत्व:…

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गुप्त नवरात्रि: श्रद्धा और साधना का पावन पर्व

परिचय गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेषकर तंत्र साधना और शक्ति उपासना के लिए जाना जाता है। यह पर्व मुख्य नवरात्रि से भिन्न होता है और इसे साल में दो बार मनाया जाता है – एक बार माघ महीने में और दूसरी बार आषाढ़ महीने में। गुप्त नवरात्रि के दौरान…

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गुरू पूर्णिमा को धारण करें पीले वस्त्र, करें भगवान विष्णु का पुजन

इंदौर। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर तुल्य है. ईश्वर रूपी गुरु के सम्मान, पूजन और महत्व के लिए हर साल आषाढ़ पूर्णिमा के दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. वेद व्यास की जयंती होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं.21 जुलाई को मनाई जाएगी गुरू पूर्णिमाजुलाई में…

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कर्क संक्रांति 2024: नव ऊर्जा और उमंग के साथ उत्सव

कर्क संक्रांति 16 जुलाई 2024 – पूरे देश में कर्क संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, जिससे यह त्योहार विशेष महत्व रखता है। कर्क संक्रांति भारतीय पंचांग के अनुसार, वर्ष के मध्य में आती है और इसे धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से…

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चातुर्मास 2024: सनातन धर्म में इस अवधि का महत्व

चातुर्मास, सनातन धर्म में चार महीनों का पवित्र अवधि है जिसका महत्व अत्यंत गहरा है। वेदिक परंपराओं से जुड़ी इस परंपरा में, चातुर्मास देवशयनी एकादशी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से शुरू होता है और प्रबोधिनी एकादशी (कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से समाप्त होता है। यह अवधि आध्यात्मिक…

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बिल्व पत्र भगवान शिव को है अति

इंदौर। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा जाता है क्योंकि वे एक बेलपत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। बिल्व पत्र भगवान शिव को अति प्रिय है। बिल्व पत्र को स्वयं भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। बिल्व पत्र की तीनों पत्तयों को शिव जी के त्रिनेत्रों का प्रतीक भी कहा जाता है।…

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सावन माह है दो दुलर्भ संयोगों से भरा हुआ,शिव पुजा का मिलेगा कई गुना फल

इंदौर। हिंदू धर्म में श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने को श्रावण महीना या सावन मास भी कहते हैं। श्रावण में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा बहुत श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है। इस बार के सावन माह…

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खजराना गणेश करते है हर मनोकामना पूर्ण

इंदौर। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश हर भक्त की मनोकामना पूर्ण करते है। यहां जो भी भक्त श्रद्धा रख कर पांच बुधवार नियमित दर्शन के लिए आता है उसके सब कृष्ट मिट जाते है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों…

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महाबली हनुमानजी के थे 5 भाई, क्‍या हैं उनके नाम, किस पुराण में है उनके परिवार का वर्णन?

महावीर हनुमान अजर-अमर बताए गए हैं. पुराणों में उनके ब्रह्मचारी होने का उल्‍लेख है, वह अविवाहित हैं. क्‍या आप हनुमानजी के परिवार के बारे में जानते हैं? उनके कितने भाई हैं, उनके भाइयों के नाम क्‍या हैं..आदि बातें. आप शायद नहीं जानते होंगे. इसलिए आज यहां जानिए. वाल्‍मीकि रामायण में हनुमानजी जन्‍म के विषय में…

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