51 शक्तिपीठ, जहां गिरे थे माता सती के अंग, वहां आज भी जागृत है माता की शक्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के शरीर के 51 अंगों के गिरने की घटनाओं से जुड़े शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ये शक्तिपीठ आज भी श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय हैं। माना जाता है कि ये स्थान माता सती के शरीर के विभिन्न हिस्सों के गिरने पर बने थे, और हर एक शक्तिपीठ देवी की विशिष्टता…

Read More

मां कूष्मांडा की पूजा से होता आर्थिक स्थिति में सुधार,आइए जाने पूजाविधी

आज, 2 अप्रैल, बुधवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है, और यह दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन की पूजा में माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए श्रद्धा और विश्वास से भरी पूजा की जाती है। आइए, जानते हैं इस दिन की…

Read More

2100 पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ बारह ज्योतिर्लिंग रुद्राभिषेक

संस्था संगम का अदभूत आयोजन इंदौर । पवित्र श्रावण माह में भक्तिमयी आयोजनों की कड़ी में संस्था संगम के द्वारा बाणगंगा ब्रिज के नीचे दो दिवसीय बारह ज्योतिर्लिंग रुद्र अभिषेक व प्रतिदिन 2100 पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर शिव भक्तों द्वारा किया गया। पार्थिव शिवलिंग पूजन करता मनोकामना पूर्णसंस्था संगम की संयोजक राधा जायसवाल ने…

Read More

बिजासन माता मंदिर में होती मुरादें पुरी

सौभाग्य और पुत्रदायिनी हैं मां इंदौर। इंदौर शहर में स्थित बिजासन माता मंदिर का इतिहास एक हजार साल पुराना है। यहां देवी के नौ स्वरूप विद्यमान हैं। किसी जमाने में आसपास काले हिरणों का जंगल होने और तंत्र-मंत्र, सिद्धि के लिए इस मंदिर की खास पहचान रही है। पूर्व में माता चबूतरे पर विराजित थीं।…

Read More

नागपंचमी पर खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट्ट

विश्व की अदभूत प्रतिमा का होता है पुजन उज्जैन। भगवान महाकाल के साथ विराजित नागचंद्रेश्वर वर्ष में एक बार नागपंचमी पर ही भक्तों को दर्शन देते है। भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से भक्त यहां पर उमड़ते है। इस मंदिर की कई विशेषता है जिसमें मुख्य यहां की प्रतिमा है जो विश्व में…

Read More

प्रदोष व्रत के पुण्य से मिटते है कलियुग के सभी कलेश

भगवान शिव-पार्वती की मिलती है विशेष कृपा इंदौर। प्रदोष व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह भगवान शंकर और देवी पार्वती को समर्पित है। इस दिन की पूजा सच्ची श्रद्धा के साथ करने से धन और वैभव का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही देवों के देव महादेव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती…

Read More

श्रावण मास: धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण महीना

श्रावण मास: धार्मिक महत्व, उत्सव, और महत्वपूर्ण दिशानिर्देश नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास का आगमन हो चुका है, जो आषाढ़ मास के बाद और भाद्रपद मास के पहले आता है। यह महीना हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, विशेषकर भगवान शिव की आराधना के लिए। आइए जानते हैं इस मास…

Read More

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: महत्व, इतिहास, और मान्यताएं

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, जिसे बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। यह भारत के झारखंड राज्य के देवघर जिले में स्थित है और इसका पौराणिक और धार्मिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। संक्षिप्त इतिहास वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख कई प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता…

Read More

चार महीनों की साधना का आरंभ: देवशयनी एकादशी 2024 का शास्त्रीय महत्व

देवशयनी एकादशी, जिसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसे भगवान विष्णु के शयन करने का दिन माना जाता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 17 जुलाई 2024 को मनाई जाएगी। शास्त्रीय महत्व:…

Read More

चातुर्मास 2024: सनातन धर्म में इस अवधि का महत्व

चातुर्मास, सनातन धर्म में चार महीनों का पवित्र अवधि है जिसका महत्व अत्यंत गहरा है। वेदिक परंपराओं से जुड़ी इस परंपरा में, चातुर्मास देवशयनी एकादशी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से शुरू होता है और प्रबोधिनी एकादशी (कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख) से समाप्त होता है। यह अवधि आध्यात्मिक…

Read More