Eternal Hinduism

रोज-रोज मंदिर जाने के बाद भी नहीं मिल रहा है फायदा, जाने क्या है कारण?

हर धर्म का अपना एक धार्मिक स्थल होता है, जहां कई परिवारों के लोग नियमित जाते है। इसके बाद भी उन्हें कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं देखने को मिल रहे है, तो इसके कई कारण हो सकते है। इस बारे में हमने जब बालाजीधाम मुकेरीपुरा के पंडित आशीष शर्मा जी से बातचीत कि तो उन्होने बताया कि मंदिर से लौटते वक्त एक भूल करते है अधिकत्तर लोग जिसके कारण पूरा पुण्य खत्म हो जाता है ।

दुसरों के पास चला जाता है पुण्य
हम किसी भी मंदिर जाते है तो वहां से लौटते वक्त दुसरे काम भी निपटाने लग जाते है। या रास्तें में किसी से भी बातचीत हंसी मजाक करने लग जाते है। अगर मंदिर से लौटते वक्त कोई आपको रोक देता है, या बुला लेता है तो आपके मंदिर जाने से आई पवित्र ऊर्जा का एक भाग वह ले लेता है। हमारे द्वारा लाई जा रही सकारात्मक ऊर्जा अब उसके पास भी पहुंच गई। मंदिर जाने का जो पुण्य आपकों मिला था वह अब उसे भी मिल गया। याने आपका कमाया पुण्य कम हो गया।

सीधे मंदिर जाए और वापस घर को लौटे
प्राचिन समय में ऋषियों ने कहा है कि घर से मंदिर सीधे जाओ और मंदिर से वापस सीधे घर आओ, ना कहीं रूकना, ना किसी से अनावश्यक बात करना, यदि आप मंदिर में अपनी पूजा-पाठ करके सीधे घर आ जाएंगे तो आपकी सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य बना रहेगा।

रास्ते में ग्रहण ना करें प्रसाद
अगर आप मंदिर से दर्शन करके लौटे रहे हैं, तो प्रसाद को कभी भी रास्ते में नहीं खाना चाहिए। ना ही इसे किसी को देना चाहिए यदि आपने भगवान को अर्पित किया है तो उसे बांट सकते है लेकिन यदि मंदिर से यह  प्रसाद मिला है तो इसे घर लाकर पूरे परिवार को बांटे और फिर ग्रहण करें। इससे आपके साथ-साथ परिवारजनों को भी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। इसके साथ ही कई लोग प्रसाद आदि चढ़ाकर मंदिर से खाली हाथ लौट आते हैं, लेकिन ऐसा करना भी शुभ नहीं माना गया है।

मंदिर से ना आएं खाली हाथ
मंदिर में जाते वक्त हम वहां पर फूल माला, अगरबत्ती, दीया और मिठाई समेत कई चीजें ले जाते हैं,  सारी चीजें हम भगवान को चढ़ा देते हैं, आपको मंदिर से खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए, आप को कुछ फूल और प्रसाद जरूर लेकर  आना चाहिए।  मंदिर से खाली हाथ लौटने को शुभ नहीं माना जाता है।

तुरंत ना धोएं हाथ-पैर
मंदिर से आते ही लोग अपने हाथ-पांव धोने लगते हैं, अगर आप भी ऐसा करते हैं तो ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है, इससे मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा आपके अंदर देर तक नहीं रहती है। यदि आप ऐसा नहीं करते है तो आप सकारात्मक रहेंगे और घर का माहौल भी अच्छा बना रहेगा।

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