Divinity

हरिहाट 2025: इंदौर में सजेगा विश्व का एकमात्र ‘भक्ति का मेला’, 28 को गोंदवले धाम अवश्य पधारे

इंदौर( पायल पांचाल) मेले तो आप सभी ने देखे है, पर ऐसा मेला ना आपने कही देखा होगा, ना कभी इस मेले के बारे मे सुना होगा। और ये मेला  पूरे विश्व में केवल हमारे इंदौर में साल भर मे एकबार ही लगता है। हम बात कर रहे है हरिहाट के मेले की, जो कि इंदौर के प्रजापत नगर में श्री क्षेत्र गौंदवले धाम में लगता है। हरिहाट का अर्थ है, भक्ति का बाजार। जिसमें सनातन धर्म की नोविधा भक्ति पर आधारित दुकाने लगाई जाती है। इस मेंले कही राम नाम जाप, भजन-कीर्तन, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, यज्ञ जैसी दुकाने लगाई है।
सनातन धर्म की अनुठी भक्ति
इस साल हरिहाट का मेला 28 दिसंबर 2025 रविवार को आयोजित होने वाला है। हरिहाट का मेला सालभर में केवल एकबार गोंदवले धाम में श्री ब्रहमचेतन्य गौंदवलेकर महाराजी की पुण्यतिथी के उपलक्ष्य में आयोजित होता है। इस मेले का उद्देश्य है कि लोग किसी माध्यम से इश्वर से जुड़े। सनातन धर्म की ऐसी अनुठी भक्ती और बिना दाम के ईश्वर भक्ती का आनंद हरिहाट में ही मिल सकता है। आप सभी से मेरा आग्रह है कि हरिहाट के मेले में जरूर पधारे।

कही कैलाश तो कही 12 ज्योतिर्लिंग
हरिहाट में सभी दुकाने इतनी सुंदर लगती है कि जिस भी दुकान पर नजर पड़ जाए वहां से नजर ही नही हटती। इस मेले में कही कैलाश पर्वत, तो कही महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरो की प्रतिकृति देखने को मिलती है। हजारो भक्त  हरिहाट में आकर में भजन कीर्तन का आनंद लेते है। इस मेले में सबसे खास दुकान होती है, श्री ब्रहमचेतन्य महाराजजी की चर्चा वाली दुकान। इस दुकान पर भक्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताते है कि गोंदवले धाम से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कैसे सकारात्क परिवर्तन आये।  इस मेले का उद्देश्य है कि लोग नौविधा भक्ति के किसी माध्यम से जुड़कर आत्म कल्याण करें और ईश्वर से जुड़े।

संत गोंदवलेकर महाराज ने लगाया था पहली बार
सनातन धर्म की नोविधा भक्ति पर आधारित हरीहाट के मेले की शुरूआत सबसे पहले संत गोंदवलेकर महाराज ने सन् 1870 में कोलकाता में की थी। उसी प्रेरणा से गोंदवले धाम में पिछले 18 सालों से हरिहाट का आयोजन किया जा रहा है।

Shares:
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *