गर्मी के इस मौसम में जब तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों बढ़ रहे हैं, तो एक नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। कनाडा के ओटावा विश्वविद्यालय में की गई एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि इंसान का शरीर पहले से ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पा रहा है। यह शोध भविष्य में भीषण गर्मियों के खतरों के बारे में चेतावनी देता है।
ओटावा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 12 स्वयंसेवकों को 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी और 57 प्रतिशत ह्यूमिडिटी के संपर्क में रखा। इस एक्सपेरिमेंट का उद्देश्य यह जानना था कि किस बिंदु पर इंसान का शरीर स्थिर तापमान बनाए रखने में सक्षम नहीं होता। 42 डिग्री के तापमान और 57 प्रतिशत ह्यूमिडिटी में इन लोगों का अनुभव 62 डिग्री के ‘सच्चे अनुभव’ के बराबर था, जो पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक था।
रिसर्च के परिणाम:
शोधकर्ता राबर्ट डी मीड ने कहा कि इस अध्ययन के परिणाम बेहद स्पष्ट थे। जैसे ही तापमान बढ़ा, प्रतिभागियों का शरीर तापमान भी लगातार बढ़ता गया, और कई लोग 9 घंटे तक इस गर्मी को सहन नहीं कर पाए। यह रिसर्च ‘थर्मल स्टेप प्रोटोकॉल’ की पहली प्रत्यक्ष पुष्टि भी प्रदान करती है, जो पिछले 50 वर्षों से गर्मी और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की सीमा का आकलन करने के लिए उपयोग में लाई जा रही है।
गर्मी से होने वाली समस्याओं की भविष्यवाणी:
यह अध्ययन आने वाले समय में होने वाली जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और ह्यूमिडिटी के प्रभावों के बारे में चेतावनी देता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ज्यादा तापमान और ह्यूमिडिटी देखी जा सकती है, जिससे स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं। खासकर युवा वयस्कों और बुजुर्गों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है।
समाज को तैयार करने की आवश्यकता:
ओटावा विश्वविद्यालय के सह-शोधकर्ता ग्लेन केनी के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य जलवायु मॉडल को शारीरिक डेटा के साथ जोड़कर गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भविष्यवाणी करना और बेहतर तैयारी करना है। इसके माध्यम से सरकारों को अधिक गर्मी वाली स्थितियों के लिए शहरों की तैयारी करने का मार्गदर्शन मिलेगा, ताकि लोगों को इस खतरनाक गर्मी से बचाया जा सके। इस रिसर्च से यह भी अंदाजा लगाया गया है कि भविष्य में अधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण शारीरिक तनाव बढ़ेगा, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण और भी आम हो सकता है।
दुनिया की छह प्रतिशत भूमि पर होगी अत्यधिक गर्मी :
लंदन के किंग्स कॉलेज द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है कि दुनिया की छह प्रतिशत भूमि पर आने वाले समय में अत्यधिक गर्मी की स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जो मानव शरीर के सहने की सीमा से बाहर होंगी। खासकर दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में यह खतरा और बढ़ सकता है। गर्मी से जुड़ी इस खतरनाक सच्चाई को समझते हुए, यह जरूरी हो गया है कि हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचने के लिए और अधिक प्रभावी उपायों की योजना बनाएं।