Eternal Hinduism

भारत में विवाह का संस्कार ही हमारे परिवारों और समाज को मर्यादित एवं संस्कारित बनाए हुए है : पं. शास्त्री

इंदौर (विनोद गोयल)। भागवत का श्रवण मनुष्य को निर्भय और भक्तिमय बनाता है। कृष्ण रुक्मणी का विवाह इस बात का साक्षी है कि भारतीय समाज और संस्कृति सारी दुनिया में श्रेष्ठ है। विवाह का बंधन हमारी परंपराओं को मजबूत और मर्यादित बनाने वाला है। अपनी संस्कृति पर हमें गर्व और गौरव होना चाहिए। भारत में विवाह का संस्कार ऐसा संस्कार है जो हमारे परिवारों और समाज को मर्यादित एवं संस्कारित बनाए हुए है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत और खूबी है। पश्चिम की संस्कृति डूबते हुए सूरज की है जहां विवाह से पहले तलाक हो जाता है या विवाह के बाद सात माह भी रिश्ता नहीं चल पाता। जूनी इंदौर मुक्ति धाम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने बुधवार को उक्त प्रेरक विचार व्यक्त किए।

मोक्षधाम पर महाप्रसादी
कथा शुभारम्भ के पूर्व उत्सव के मनोरथी प्रमोद रामेश्वर खटोड़ एवं राहुल सोनकर के साथ जगदीश पांचाल , रामेश्वर कुमावत , प्रेम चौहान , ओपी मालू, अरविन्द शर्मा, ओमप्रकाश सोनकर सहित अनेक भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया। संयोजक अशोक सारडा एवं राजेश जोशी ने बताया कि कथा के पूर्णाहुति गुरुवार को शाम 5 बजे सुदाम चरित्र प्रसंग के साथ होगी इसके बाद शाम 5.30 बजे से प्रमोद रामेश्वर कुमावत एवं राहुल सोनकर मित्रमंडल के सहयोग से मोक्षधाम पर पहली बार महाप्रसादी का आयोजन होगा। कथा के दौरान भगवान कृष्ण और रुक्मणी विवाह का जीवंत उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन महामृत्युंजय मंदिर में बैठकर पूजा अर्चना भी कर रहे हैं। मोक्ष धाम परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में पं. राजेश तिवारी एवं अन्य विद्वानों द्वारा भागवत का मूल पारायण भी किया जा रहा है। संगीतमय कथा का समापन 29 जनवरी को दोपहर 1 से 4 बजे तक सुदामा चरित्र कथा के बाद होगा। 30 जनवरी को मोक्ष धाम पर रखी हुई दिवंगतों की अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन कर दिया जाएगा। समिति की ओर से दिवंगतों के परिजनों से आग्रह किया गया है कि वे अपने प्रियजनों, स्वजनों की अस्थियाँ 30 जनवरी के पहले मोक्ष धाम से ले जाएँ।

आस्था परंपराओं में भी है
पं. शास्त्री ने कहा कि हम जन्म, मुंडन, अन्नप्राशन, शिक्षारंभ से लेकर विवाह के लिए भी मुहूर्त और तिथि देखकर काम करते हैं क्योंकि हमारी आस्था और श्रद्धा अपनी परंपराओं में भी है। दुनिया में किसी और देश में यह सब नहीं होता। आज पश्चिमी देशों में सामाजिक एवं नैतिक मूल्य टूट रहे हैं। वहां चार लोग एक परिवार में 4 दिन नहीं रह सकते, हम 40 सदस्यों का परिवार चार पीढ़ियों तक साथ चलाते हैं। यही कारण है कि अब भी अनेक विदेशी जोड़े भारत आकर विवाह करना चाहते हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। श्रीमद भागवत पर अनेक शोधकार्य आज भी हो रहे हैं फिर भी अब तक कोई संपूर्णता प्राप्त नहीं कर पाया है। यही भागवत में भगवान की वाणी होने का सबसे मजबूत प्रमाण है।

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