इंदौर में सियागंज वेयर हाउस रोड़ पर एक भक्त बाबा महॉकाल सेठ की दुकान संचालित कर रहे है। यह दुकान महॉकाल के भक्तों को रिझाती है। यहां महॉकाल की भक्ति के साथ जरूरंतमंदों की सेवा भी की जा रही है। सबसे सकून देने वाली बात यह हैकि यहां जरूरतमंदो को चाय-पोहा फ्री खाने से पहले 108 बार जय श्री महॉकाल लिखना होता है। यहां पर चाय-पोहा फ्री खाने के लिए बाबा महॉकाल का नाम जप करना होता है यह अदभूत सोच है जो जरूरतमंदों को चाय नाश्ते के साथ ही भगवान महॉकाल की भक्ति करने की सीख भी देती है।
लाल रंग की स्याही से होता है लिखना
यहां हर व्यक्ति को जय श्री महॉकाल, 108 बार लिखना होता है। यह लिखने के लिए लाल रंग की स्याही का प्रयोग करना अनिवार्य है। जो भी व्यक्ति यह लिख कर देता है उसे चाय-पोहा फ्री मिलता है। यह आवश्यक नहीं है कि कोई वहीं बैठ कर नाम लिखे जो हाथ से नामजप लिखा हुआ कागज देता है उसे वह चाय-पोहा फ्री दे देंते है।
भक्ति की अदभुत मिसाल
यहां के संचालकों का कहना है कि हमारे पिता 1972 से यह दुकान संचालित कर रहे है जिसका उद्देश्य भगवान महॉकाल के नाम जप करना सीखाना है इसके साथ ही यहां पर दुकान में हमेशा भगवान महाकाल के लाइव दर्शन चलते रहते है। जिनके पास पैसे होते है वह व्यक्ति भी कई बार नाम लिख कर बाबा महॉकाल के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाते है।
धर्म का होता है प्रचार प्रसार
नई पीढ़ी में बाबा महॉकाल की भक्ति की अलग जगाने के लिए यह दुकान एक प्रेरणा बनती है कि अपने व्यवसाय के साथ कैसे भक्ति भी की जा सकती है। भगवान का नाम जप लिखना इतना आसान नहीं होता है जो भी लिखता है उसे यह बात लिखने के दौरान समझ में आती है कि यदि नामजप लिखा जाए तो व्यक्ति का जीवन बदल जाता है। यहां पर आज तक कोई भी सतत ऐसा व्यक्ति नहीं आता जो फ्री में खाने की लालसा रखता हो यहां वहीं आते है जो भगवान महॉकाल के भक्त होते है। इसका मुख्य उद्देश्य तो महॉकाल के नाम जप करना सिखाना है।


