इंदौर(विनोद गोयल)। फतेहाबाद हरियाणा से आए भजन गायक नरेश नरसी, दिल्ली के मास्टर श्याम और इंदौर के रवि शर्मा ने रविवार की शाम बर्फानी धाम के पास, पानी की टंकी के सामने स्थित कमल नयन उपवन पर श्याम बाबा के सुसज्जित दरबार में अपने भजनों से ऐसा समां बाँधा की हर कोई मंत्रमुग्ध होकर, नाचने, गाने और झूमने लगा। हजारों श्याम भक्तों ने इस मौके पर श्याम बाबा के दरबार की साज-सज्जा, अखंड ज्योत, छप्पन भोग, मोरछड़ी एवं सुगंधित फूलों तथा इत्र की खुशबू के बीच इस सुहावनी भजन संध्या का आनंद और पुण्य लाभ उठाया।
खाटू श्याम दरबार में उमड़े श्रद्दालू
मंदिर के 23वें वार्षिकोत्सव की श्रृंखला में रविवार की शाम को बर्फानी धाम की छत्रछाया में कमल नयन उपवन परिसर में बाबा मदनलाल शर्मा एवं शहर के अन्य प्रमुख धर्म स्थलों, खाटू श्याम मंदिरों के पुजारियों तथा श्याम भक्तों के संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के आतिथ्य में श्याम बाबा की आरती के साथ भजन संध्या का यह मनोहारी आयोजन पूरे जोश एवं लगन के साथ प्रारंभ हुआ।
समाजसेवी विष्णु बिंदल, टीकमचंद गर्ग सहित अन्य अतिथियों ने भजन गायकों का स्वागत कर भजन संध्या का शुभारम्भ किया। मंदिर समिति के प्रमुख रामकुमार अग्रवाल, सुरेश रामपीपल्या, चंद्रेश बंसल, राजकुमार चितलांगिया, अनिल ताम्बी, मनोज चितलांगिया, ओम मंडावरिया, जयप्रकाश इंदौरिया, पं. राघव शर्मा, पं. राजेंद्र शास्त्री, अंकुर सुरेका एवं ओम शर्मा ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। सांसद शंकर लालवानी, मंत्री तुलसी सिलावट, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने भी खाटू श्याम दरबार के पूजन का पुण्य लाभ उठाया।

जब से मुझे दरबार मिला श्याम का
भजन संध्या का शुभारंभ इंदौर के रवि शर्मा ने ‘पग-पग पर समझाते….’, ‘खाटू वाले तू मुझको बुला ले…..’ जैसे भजनों के साथ किया। माहौल धीरे-धीरे गर्मजोशी से भर उठा जब दिल्ली के मास्टर श्याम ने भी मंच संभाला और ‘जब से मुझे दरबार मिला श्याम का….’, ‘कब मैं खाटू जाऊंगा…..‘, ‘मेरा श्याम है….’ आदि भजनों से भक्तों को थिरकने पर बाध्य कर दिया। फतेहाबाद हरियाणा से आए नरेश नरसी ने जैसे ही बाबा के दरबार में पहुंचकर मत्था टेंका, समूचा मैदान श्याम बाबा के जयकारे से गूँज उठा। नरसी ने ‘अच्छा लागे से….’, ‘अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…’, ‘आ जा कलयुग में लेके अवतार ओ गोविंद….’, ‘वीर हनुमाना अति बलवाना….’ जैसे अपने मारवाड़ी, हरियाणवी, राजस्थानी और हिंदी भजनों से श्रोताओं को खूब रिझाया। भजन संध्या शायद ही कोई ऐसा श्रोता बचा होगा जिसने भजनों पर खुद को नाचने, गाने और झूमने से रोका होगा। फूलों एवं रंगों की होली के साथ इस शानदार भजन संध्या का समापन हुआ।


