Eternal Hinduism

जीने की कला रामायण और मरने की कला सिखाती है भागवत – पं. शास्त्री

इंदौर(विनोद गोयल) । भागवत और भगवान का नाम सदैव अमर है। जीने की कला रामायण और मरने की कला भागवत सिखाती है। भागवत हम हजारों वर्षों से सुनते आ रहे हैं फिर भी यह हमेशा नूतन एवं प्रेरक अनुभूति प्रदान करती है। भगवान की भक्ति निर्मल मन से की जाना चाहिए तभी भगवान प्रसन्न होंगे। निष्काम भक्ति ही सच्ची भक्ति होती है। भारत, भगवान और भक्ति एक-दूसरे के पर्याय हैं। जूनी इंदौर मुक्ति धाम सेवा समिति के तत्वावधान में शुक्रवार से प्रारंभ सात दिवसीय भागवत ज्ञानयज्ञ में भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने शुभारंभ सत्र में उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए।
मोक्ष धाम पर भागवत ज्ञान यज्ञ
कथा का शुभारंभ बलवीर हनुमान मंदिर से से कलशयात्रा के साथ हुआ। आयोजन समिति के संयोजक अशोक सारडा एवं राजेश जोशी ने बताया कि जूनी इंदौर मोक्ष धाम परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में प्रमोद खटोड, लक्ष्मण माहेश्वरी, रामनिवास भराणी, राहुल सोनकर, अनिल राठोर, ओमप्रकाश सोनकर एवं ओमप्रकाश राठोर सहित सैकड़ों भक्तों ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर कथा का शुभारम्भ किया। मंदिर के पुजारी आचार्य पं. राजेश तिवारी सहित विद्वानों ने मूल पारायण किया। मोक्ष धाम पर भागवत ज्ञान यज्ञ का यह अनूठा आयोजन शहर में दूसरी बार हो रहा है। इसके पूर्व पंचकुईया स्मशान घाट पर समाजसेवी ब्रह्मलीन प्रेम बाहेती ने भी भागवत कथा का आयोजन कराया था। उनसे प्रेरणा लेकर ही जूनी इंदौर मोक्ष धाम पर यह आयोजन किया जा रहा है। कथा शुभारम्भ के पूर्व संयोजक अशोक सारडा, राजेश जोशी, लक्ष्मण माहेश्वरी, राहुल सोनकर आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।

दिवंगतों की अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन
संगीतमय कथा 29 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक होगी। 30 जनवरी को मोक्ष धाम पर संगृहित रखी हुई दिवंगतों की अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन कर दिया जाएगा, यदि दिवंगतों के परिजन उन अस्थियों को नहीं ले जाएँगे तो। समिति की ओर से दिवंगतों के परिजनों से आग्रह किया गया है कि वे अपने प्रियजनों, स्वजनों की अस्थियाँ 30 जनवरी के पहले ले जाएँ।

पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने मोक्ष धाम पर भागवत की महत्ता बताते हुए कहा कि संसार में व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके कर्म और गुणों के कारण उसका नाम अमर होता है। कलियुग में हरि का नाम सबसे सरल है। इनकी महत्ता कभी कम नहीं हो सकती। भगवान तो सच्चे भक्त पर विशेष कृपा करने के लिए ही बैठे हैं, बशर्ते हमारी भक्ति में निष्काम भाव हो। भागवत ऐसा दिव्य प्रेरक ग्रन्थ है जो सदैव सबका कल्याण ही करता है। यह ऐसी दिव्य औषधि है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। पैसों से जरूरतें पूरी होती हैं और सत्संग से इच्छाएं। ज्ञान उसे ही देना चाहिए, जो उसकी कीमत समझे।

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