इंदौर(विनोद गोयल)। स्वच्छता में आठ बार नंबर वन का ख़िताब पाने वाले इंदौर शहर में आज भी सबसे बड़ी और ज्वलंत समस्या यातायात को लेकर बनी हुई है। विडम्बना यह है कि यहाँ आने वाले सभी शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी यातायात व्यवस्था सुधारने को अपनी पहली चुनौती मानते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद आज तक यातायात का ढर्रा जस का तस बना हुआ है।
विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने दिए सुझाव
झंडा ऊँचा रहे हमारा अभियान के तहत संस्था सेवा सुरभि ने शनिवार को इंदौर प्रेस क्लब की सहभागिता में राजेंद्र माथुर सभागृह में बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ आशीष वर्मा को आमंत्रित कर “शहर का यातायात, परिदृश्य और समाधान” विषय पर प्रभावी परिचर्चा का आयोजन किया। वर्मा ने प्रोजेक्टर की मदद से अपने अध्ययन के निष्कर्ष भी बताए और शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए जो महत्वपूर्ण सुझाव दिए उनमें सबसे महत्वपूर्ण बातें ये रही कि बस सेवाओं अर्थात लोक परिवहन को बढ़ावा दिया जाए, पैदल और साइकिल पर चलने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग और क्रासिंग बनाए तथा निजी गाड़ियों के उपयोग को कम किया जाए। सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित शहर के अनेक प्रबुद्धजन, वरिष्ठ पत्रकार भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अभियान
संस्था सेवा सुरभि द्वारा जिला प्रशासन, इंदौर पुलिस, नगर निगम एवं विकास प्राधिकरण की सहभागिता में चलाए जा रहे ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अभियान के तहत शनिवार को हुई इस परिचर्चा में बेंगलुरु से आए यातायात विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने अपनी बात समझाने के लिए ऑस्ट्रिया के विएना शहर की यातायात व्यवस्था के माध्यम से प्रोजेक्टर और आंकड़ों की मदद से परदे के माध्यम से अपनी राय साझा की। प्रारंभ में सांसद शंकर लालवानी, संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा, अतुल सेठ, एसजीएसआईटीएस के डायरेक्टर नितेश पुरोहित और प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने दीप प्रज्वलन कर परिचर्चा का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी, कीर्ति राणा, गौतम कोठारी, मोहन अग्रवाल, डॉ. सचिन नारोलकर, संजय त्रिपाठी, निकेतन सेठी, रमेश गुप्ता पीठेवाले एवं अन्य सदस्यों ने किया। अतुल सेठ ने आशीष वर्मा का परिचय दिया। संस्था की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। संचालन किया अरविन्द तिवारी ने।
स्टैण्डर्ड ऑफ़ लिविंग का क्या मतलब?
वर्मा ने कहा कि जब जीवन में शुद्ध हवा और शुद्ध पानी ही नहीं होंगे तो स्टैण्डर्ड ऑफ़ लिविंग का क्या मतलब। आज सिंगापुर के हर आदमी की इनकम हमारे देश के किसी सीईओ से ज्यादा है। इसके बाद भी वहां के लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग भी करते है और यातायात नियमों का पालन भी करते हैं। हमारे देश में हर शहर में हर जगह सड़कें खुदी पड़ी हुई हैं। कहीं जाने के लिए घंटों ट्रैफिक में फंसे या खड़े रहना पड़ता है। साइकिल वाले बहुत मुश्किल से दिखाई देते हैं। इन तमाम व्यस्थाओं को हमें समझना और बदलना होगा। हमें समझना होगा कि हमें क्वालिटी ऑफ़ लाइफ चाहिए या स्टैण्डर्ड ऑफ़ लाइफ? आज हमारे परिवारों की स्थिति यह है कि हर फैमिली मेम्बर के पास अपनी अलग गाडी है पर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ किसी के पास नहीं है। इन गाड़ियों की वजह से हम हर दिन इतना प्रदूषण अंदर खींच रहे हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
ट्रैफिक मैनेज करना बहुत काम्प्लेक्स और टफ काम
उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था सुधारने में हमें ही चिंता करना पड़ेगी। इसमें पुलिस का कोई रोल नहीं है फिर भी हम उन्हीं पर निर्भर रहते हैं और उन्हीं को कोसते हैं। ट्रैफिक मैनेज करना बहुत काम्प्लेक्स और टफ काम है। इसके लिए हमें ही अवेयर रहना होगा कि हम अटरेकटिव ट्रासपोर्ट बनाएं और उनका उपयोग भी करें। फुटपाथ व्यवस्था भी ऐसी होना चाहिए कि जिसमें साइकिल और पैदल चलने वाले आसानी से चल सकें। वर्मा ने अपनी बात का निष्कर्ष देते हुए जो सुझाव दिए उनका सार यही है कि हम लोक परिवहन को बढ़ावा दें, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत बनाएं, निजी गाड़ियों के उपयोग को कम करें और पैदल तथा साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित और क्रासिंग बनाएं।
ट्रैफिक को सुधारने के लिए हो ईमानदार प्रयास
वरिष्ठ पत्रकार अमित मंडलोई ने कहा कि शहर में वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है। इस लंबे ट्रैफिक को सुधारने के लिए ईमानदार प्रयास होना चाहिए। यातायात सुधारने के लिए हमें सामूहिक जिम्मेदारी की भावना बनाना होगी। हमने शहर को साफ़ करने की जिम्मेदारी ली और करके भी दिखाया तो इन 8 वर्षों में कोई अन्य शहर हमसे आगे नहीं बढ़ पाया। यातायात सुधारने के लिए भी हमें इसी तहत का दृढ संकल्प और उद्देश्य रखना होगा।
लोक परिवहन के साधनों को अपनाना आवश्यक
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि केवल लोक परिवहन की बसों पर हम पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते। ये वित्तीय रूप से बहुत घाटे का सौदा होगा। हमें अन्य विकल्पों पर भी विचार करना होगा। साइकिल चलाना, पैदल चलना और सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करना भी हमें शुरू करना होगा। हमें आज से ही शुद्ध हवा और शुद्ध पानी के लिए ठोस कदम उठाना होंगे। यदि अब भी नहीं चेते तो राजधानी दिल्ली जैसी हालत हमारी भी हो सकती है। इस अवसर पर शिक्षाविद डॉ. एसएल गर्ग, राजकुमार जैन, सुनील अजमेरा, अखिलेश जैन, विवेक तिवारी, हरेराम वाजपेयी सहित बड़ी संख्या में शहर के जिम्मेदार और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ।


