श्रावण मास: धार्मिक महत्व, उत्सव, और महत्वपूर्ण दिशानिर्देश
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास का आगमन हो चुका है, जो आषाढ़ मास के बाद और भाद्रपद मास के पहले आता है। यह महीना हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, विशेषकर भगवान शिव की आराधना के लिए। आइए जानते हैं इस मास की महत्वता, उत्सव की परंपराएँ और इसके पालन के दिशानिर्देश।
महत्व:
श्रावण मास को धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व प्राप्त है। इस महीने की शुरुआत के साथ ही भगवान शिव की पूजा और उपासना का विशेष महत्व बढ़ जाता है। श्रावण मास के दौरान भगवान शिव के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, और शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की विशेष व्यवस्था होती है।
उत्सव और परंपराएँ:
- श्रावण सोमवारी: इस दिन विशेष रूप से शिव भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग की पूजा करते हैं। यह दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- नाग पंचमी: नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है। इस दिन विशेष रूप से नागों की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए पूजा की जाती है।
- हरियाली अमावस्या: इस दिन को पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। विशेष रूप से वृक्षारोपण का महत्व होता है।
- रक्षाबंधन: यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।
पालन के दिशानिर्देश:
करें:
- पवित्रता बनाए रखें: इस महीने में पवित्रता और साफ-सफाई पर ध्यान दें। रोजाना स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- सच्ची श्रद्धा से पूजा करें: भगवान शिव की पूजा और उपासना सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक करने से विशेष लाभ होता है।
- व्रत और उपवास रखें: सोमवार को विशेष रूप से व्रत रखें और उपवास करें। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
न करें:
- नशा और बुरे आचार-व्यवहार से बचें: इस महीने में नशा और बुरे आचार-व्यवहार से दूर रहें। इसे पवित्रता और संयम का समय मानें।
- अशुद्ध खाद्य पदार्थ से बचें: मांसाहार, शराब, और अन्य अशुद्ध खाद्य पदार्थों से बचें। इसे व्रत और संयम का समय मानें।
इस प्रकार, श्रावण मास न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि प्राकृतिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। इसे विशेष श्रद्धा और नियमों के साथ मनाना चाहिए ताकि इसका पूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सके।