इंदौर(विनोद गोयल)। हमारा जीवन कर्म प्रधान है। दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं को मूल्यनिष्ठ, सेवा प्रधान और जागरूक बनाने के लिए निरंतर सार्थक पुरुषार्थ
नर्मदा साहित्य मंथन के द्वितीय सत्र को सम्बोधित करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के प्रमुख अभय महाजन ने कहा कि गांवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव
इंदौर(विनोद गोयल) जिसने भी स्वयं को श्रीराम से जोड़ा है, उसने हनुमान की तरह अदभुत काम किए हैं। राम का चरित्र काफी उदार है। राम के चरित्र में पुरुषार्थ, प्रेम,




