possible

Eternal Hinduism

जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं मूल्यनिष्ठ, पुरुषार्थ करें – पं. मेहता

इंदौर(विनोद गोयल)।  हमारा जीवन कर्म प्रधान है। दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं को मूल्यनिष्ठ, सेवा प्रधान और जागरूक बनाने के लिए निरंतर सार्थक पुरुषार्थ
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गांवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव ही नहीं – अभय महाजन

नर्मदा साहित्य मंथन के द्वितीय सत्र को सम्बोधित करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के प्रमुख अभय महाजन ने कहा कि गांवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव
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राम-कृष्ण का अवतरण सिर्फ भारत भूमि पर ही संभव, किसी अन्य देश की इतनी पुण्याई और पवित्रता नहीं हो सकती : पं. भार्गव

इंदौर(विनोद गोयल)  जिसने भी स्वयं को श्रीराम से जोड़ा है, उसने हनुमान की तरह अदभुत काम किए हैं। राम का चरित्र काफी उदार है। राम के चरित्र में पुरुषार्थ, प्रेम,