Eternal Hinduism अपनी वाणी को वीणा में बदलने का प्रयास करें, यही हमारे धर्म आचरण का प्रमाण होगा – पं. शास्त्री इंदौर। भगवान कहीं और नहीं हमारे अंतर्मन में ही विराजित है लेकिन उन्हें अनुभूत करने के लिए मन को मथना जरूरी है। जिस तरह मक्खन को मंथन के बाद घी Bharti joshi1 month agoKeep Reading