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विश्व की एकमात्र मोक्षदात्रि नदी “मां नर्मदा” जिसकी संत और भक्त करते परिक्रमा
Last Update on November 11, 2025
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भारत में एक ऐसी नदी है जिसका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है. लोग इसकी परिक्रमा करते हैं. इस नदी का नाम नर्मदा है जो मध्य प्रदेश से निकलती है. ये दुनिया की अकेली नदी है जिसकी लोग परिक्रमा करते हैं। नर्मदा नदी को जीवन देने वाला कहा जाता है. क्योंकि नदी मध्य प्रदेश से शुरू होकर जब बंगाल की खाड़ी में समाप्त होती है, तो बीच में नदी किनारे बसे इलाके को जीवन देती है. लोगों के लिए यह नदी आस्था का एक बड़ा प्रतीक हैं। ये दुनिया की एकमात्र नदी है, जिसकी संत और भक्त परिक्रमा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस परिक्रमा को करने से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
200 नदियों में सबसे महान नदीं मां नर्मदा
भारत नदियों का देश हैं. यही वजह है कि यहां छोटी से लेकर बड़ी को लगभग 200 से ज्यादा नदियां मौजूद है. सनातन धर्म में लोग नदियों को भगवान का रूप मानकर आराधना करते हैं. माना जाता है कि नदियों में नहाने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती हैं। जिसमें मां नर्मदा का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। मान्यता है कि जहां मां नर्मदा का हर एक कंकर को शिव माना जाता है। उसी तरह मां नर्मदा का उल्टी दिशा में बहना मां नर्मदा के संकल्प और स्वाभिमान की निशानी है।
3 हजार 800 किलोमीटर की है परिक्रमा
नर्मदा परिक्रमा लगभग 3,500 से 3,800 किलोमीटर लंबी है। यह यात्रा नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से शुरू होकर उसके मुहाने भरूच तक जाती है और फिर विपरीत तट पर वापस आकर पूरी होती है। इस परिक्रमा में आम तौर पर पैदल 200-250 दिन लगते हैं, लेकिन इसे किराए के वाहन से भी किया जा सकता है।
अमरकंटक या ओंकारेश्वर से शूरू होती है परिक्रमा
नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग नर्मदा के उद्गम स्थान अमरकंटक या ओंकारेश्वर या किसी भी घाट से यात्रा की शुरूआत कर सकते है. लेकिन उसी स्थान पर वापस लौटकर परिक्रमा को पूरी करनी पड़ती हैं।
पापों से हो जाता है छुटकारा
पुराणों की मानें, तो नर्मदा परिक्रमा करने से लोगों को पापों से छुटकारा और मोक्ष मिलता है. पैदल परिक्रमा करने लोग दिन भर चलने के बाद शाम के समय मां नर्मदा की आरती और भजन में मगन हो जाते है. ये भारत की सबसे अनोखी नदी है, क्योंकि ये उल्टी दिशा में बहती है. नर्मदा परिक्रमा एक लंबी पैदल यात्रा होती है. इसे कई लोग कार, वाहन से भी पूरा करते हैं. मध्य प्रदेश के अमरकंटक से शुरू होकर गुजरात की खंभात की खाड़ी में नर्मदा नदी मिलती है। इस यात्रा में श्रद्धालु नर्मदा नदी के चारों तरफ लगभग 1,320 किमी पैदल चल कर भी मां नर्मदा की परिक्रमा पूर्ण करते है।
देवउठनी एकादशी से शुरू होती है परिक्रमा
नर्मदा परिक्रमा की शुरूआत देव उठनी एकादशी से होती है। जब चातुर्मास पूर्ण कर साधू संत भी इस यात्रा में शामिल हो जाते है। सनातन धर्म में जहां चातुर्मास का एक अलग महत्व होता है। उसी तरह मां नर्मदा की परिक्रमा करना संत समाज के लिए भी एक संकल्प होता है जब वह मां नर्मदा के आंचल में स्वयं को पाते है।