इंदौर(पंकज शर्मा)। सत्र नियोजन युवा महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय युवा महोत्सव का शुभारंभ 6 फ़रवरी को उत्साह, ऊर्जा और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण वातावरण में हुआ। महोत्सव के प्रथम दिवस युवा शक्ति, वैचारिक जागरण और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में गंभीर मंथन देखने को मिला। कार्यक्रम का आरंभ स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ, जहाँ उपस्थित अतिथियों एवं युवाओं ने भारत के महान विचारक को नमन कर उनके आदर्शों को स्मरण किया।
प्रदर्शनी और पुस्तक मेला का आयोजन
माल्यार्पण के पश्चात परिसर में लगी विभिन्न विषयों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं भ्रमण किया गया। साथ ही पुस्तक मेला एवं फूड मेला का विधिवत शुभारंभ हुआ, जिसने युवाओं को ज्ञान, संस्कृति और स्वाद—तीनों से जोड़ने का कार्य किया। मालवा अंचल के पारंपरिक व्यंजनों ने युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। दीप प्रज्वलन के साथ औपचारिक मंचीय कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। समारोह में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के कुलगुरु राकेश सिंह, कुलसचिव प्रज्वल खरे तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख (मध्य क्षेत्र) एवं मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र जी मंचासीन रहे। स्वागत उद्बोधन में कुलगुरु राकेश सिंह ने कहा कि युवा महोत्सव जैसे आयोजन युवाओं को राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्वबोध से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम की प्रस्तावना युवा महोत्सव समिति के संयोजक धर्मेंद्र जाट ने रखी।
राष्ट्र निर्माण के लिए केवल आधुनिकता नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार आवश्यक
प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र जी ने “RSS @ 100 : विचार, योगदान और भविष्य की दिशा” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। राष्ट्र निर्माण के लिए केवल आधुनिकता नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा और समर्पण का भाव भी आवश्यक है। उनके ओजस्वी और प्रेरक उद्बोधन ने युवाओं में आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को और सुदृढ़ किया।
समाज की जागरूकता से भी राष्ट्र की सुरक्षा
द्वितीय सत्र में ब्रिगेडियर रजत कुमार (डायरेक्टर, फैकल्टी ऑफ स्ट्रेटेजी, आर्मी वॉर कॉलेज, महू) ने आंतरिक सुरक्षा एवं सामुदायिक सुरक्षा की आवश्यकता विषय पर विचार रखते हुए युवाओं से सतर्क, अनुशासित और राष्ट्रहित में सजग भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता से भी सुनिश्चित होती है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न चरणों में आयोजित फिल्म स्क्रीनिंग सत्रों में Wokeness, Sahebs Who Never Left तथा Narmada – The Eternal River जैसी वैचारिक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायी फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। ‘Wokeness’ विषयक फिल्म का उद्घाटन सचिन शर्मा द्वारा किया गया, जिसे युवाओं ने गंभीर रुचि के साथ देखा।
डिजिटल भारत : आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त यात्रा
दोपहर पश्चात तृतीय सत्र में “डिजिटल भारत : आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त यात्रा” विषय पर विनीत तिवारी एवं प्रशांत कोल्हापुरे ने डिजिटल क्रांति, पारदर्शिता, सुशासन एवं भ्रष्टाचार-मुक्त प्रणाली पर अपने विचार साझा किए। इस सत्र में युवाओं ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से सक्रिय सहभागिता भी की। चतुर्थ सत्र में “फिल्मों और वेब-सीरीज़ का युवा मानस पर प्रभाव” विषय पर संजीव नेवर जी एवं प्रवीण चतुर्वेदी ने युवाओं के सोच-विचार पर मीडिया के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन श्री नमन शर्मा जी ने किया।
हजारों युवाओं की सक्रिय सहभागिता
महोत्सव के दौरान मालवा प्रांत के हजारों युवाओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। भावोदय प्रतिभा प्रदर्शन के अंतर्गत युवाओं ने कविता, गायन, वक्तृत्व एवं अन्य रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पुस्तक स्टॉल्स पर युवाओं की विशेष भीड़ देखने को मिली, जो अध्ययन और वैचारिक साहित्य के प्रति उनकी रुचि को दर्शाती है।
प्रथम दिवस का समापन सायंकाल आयोजित भव्य लाइट एवं साउंड शो से हुआ, जिसमें “तिलक इज़्ज़त रखा प्रेम ताका” प्रस्तुति लेखक एवं निर्देशक जोना सिंह खीवा द्वारा प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए राष्ट्र, संस्कृति और इतिहास के प्रति गौरव का अनुभव कराया। युवा महोत्सव का प्रथम दिवस ऊर्जा, विचार, संस्कार और सहभागिता से परिपूर्ण रहा, जिसने युवाओं को राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया।


