इंदौर,(विनोद गोयल) अंग्रेजी नए वर्ष के अवसर पर पड़ोसी देश नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में इंदौर के विमानतल मार्ग स्थित श्री श्री विद्याधाम के महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती की प्रेरणा से भागवताचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से काठमांडू में भागवत कथा के समापन प्रसंग पर शहर एवं मालवांचल के करीब 250 श्रद्धालुओं ने कथामृत पान तो किया ही, भगवान पशुपतिनाथ से भारत में सुख, शांति एवं सद्भाव के लिए भी प्रार्थना की। वहां पूरे आठ दिनों तक भारतीय परंपरा के अनुरूप कथा और अन्य उत्सवों का आयोजन किया गया, जिनमें वहां के भक्त भी शामिल हुए।

तीर्थस्थलों पर भागवत कथा
श्रीमद भागवत सेवा भक्त मंडल के पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि कथा का शुभारंभ भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से भव्य शोभा यात्रा के साथ हुआ। पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी नारायण गुरु ने भी कथा स्थल आकर व्यास पीठ का पूजन भी किया और कथा श्रवण कर भक्तों को आशीर्वाद भी दिए। इस अवसर पर मुख्यरूप से कृष्णा सिंह पटेल, लाखन सिंह पटेल, सुनील शर्मा, चयन अग्रवाल, गणेश प्रसाद गायन, प्रदीप वर्मा, दिनेश सोनी, गोवर्धन सिंह सोनगरा एवं धर्मेश शास्त्री ने विभिन्न व्यवस्थाएं संभाली। भागवताचार्य पं. शास्त्री इसके पूर्व रामकथा एवं शिव पुराण सहित 100 से ज्यादा अनुष्ठान नेमिषारण्य, द्वारका, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम, बद्रीनाथ, वृंदावन एवं अयोध्या सहित ओंकारेश्वर जैसे तीर्थस्थलों पर देश-विदेश के भक्तों को ले जाकर संपन्न करा चुके हैं। काठमांडू से इंदौर आगमन पर सभी भक्तों का स्वागत किया ।
इंदौर से पहुंचे थे 250 से अधिक श्रद्दालु
मंडल के प्रमुख पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि इस बार देश-विदेश के 250 श्रद्धालुओं ने नेपाल में कथा श्रवण का पुण्य लाभ उठाया। ये सभी लोग नए वर्ष में इंदौर से उज्जैन, उज्जैन से गोरखपुर होते हुए भैरवा बॉर्डर से सड़क मार्ग से काठमांडू पहुंचे। इनमें से करीब 100 श्रद्धालुओं ने हवाई मार्ग से और शेष ने बस एवं रेल मार्ग से अपनी मंजिल तय की। काठमांडू में भागवत कथा के साथ ही प्रतिदिन सौभाग्यवती कन्या पूजन, पार्थिव शिवलिंग पूजन, रुद्राभिषेक, अर्चन एवं भागवतजी का मूल परायण भी किया गया। इसके लिए श्री श्री विद्याधाम से 23 विद्वान ब्राह्मण भी काठमांडू गए थे। विद्याधाम के संस्थापक महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती “भगवन” के आशीर्वाद से यह दिव्य आयोजन अनुष्ठान रूप मे निर्विघ्न संपन्न हुआ और पशुपतिनाथ मंदिर में इंदौर के भक्तों ने दर्शन, पूजन के साथ ही 56 भोग भी समर्पित किए। काठमांडू में कथा के दौरान भोजन, प्रसाद आदि की सभी व्यवस्थाएं इंदौर के सेवकों ने ही संभाली।
पशुपति नाथ की कृपा से हुई संपन्न
पूर्व में यह अनुष्ठान गत 11 से 18 सितम्बर तक काठमांडू में प्रस्तावित था, लेकिन 10 सितम्बर को ही काठमांडू में हिंसक घटनाएं होने के कारण अनेक श्रद्धालुओं को या तो बीच रास्ते से लौटना पड़ा या जो वहां पहुंच चुके थे, उन्हें दो-तीन दिनों तक वहीं होटलों में कैद होकर रहना पड़ा था। कथा के सूत्रधार पं. दिनेश शर्मा भी उस दौरान कथा की तैयारियों के लिए दो दिन पहले काठमांडू पहुंच गए थे, लेकिन तभी हिंसक घटनाएं हो गई और उन्हें भी होटल में कैद रहना पड़ा था। अंततः सरकार के सहयोग से वे और उनके साथी सकुशल हिन्दुस्तान लौट आए और दोगुने उत्साह के साथ उन्होंने फिर से काठमांडू में पशुपतिनाथ भगवान की साक्षी में भागवत ज्ञान यज्ञ के अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया।


