भारत उदय कार्यक्रम के तहत तृतीय सत्र में जेम्स ऑफ बॉलीवुड प्लेटफॉर्म की प्रमुख स्वाति गोयल शर्मा ने ’भारत का सिनेमाः सिनेमा में भारत’ विषय पर अपनी बात रखी। श्रीमती शर्मा ने कहा, पाकिस्तान की फिल्में में भारत की छबि को वर्ग आधारित नैरेटिव के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जो गलत है। विभाजन के बाद भी पाकिस्तान के नैरेटिव को भारत में चलाने का श्रेय भी बॉलीवुड को ही जाता है।
गलत नैरेटिव को भारत में सही बताने काम
भारत के कुछ निदेशकों ने पाकिस्तान के गलत नैरेटिव को भारत में सही बताने का काम किया। सत्तर के दशक में फिल्मों और शायरियों में उर्दू शब्दों का प्रयोग हिन्दू विरोधी नैरेटिव को बढ़ाने में किया गया। फिल्मों ने ही भारत में लव जिहाद को भी बढ़ावा दिया। एक समय लव जिहाद शब्द भारत में नहीं था, लेकिन फिल्मों ने इसे आज स्थापित कर दिया।
सामाजिक व्यवस्था को नुकसान
बॉलीवुड से भारत की सामाजिक व्यवस्था को नुकसान हो रहा है। भारत माता के स्परूप को विकृत करने का भी भारत में फिल्मों के माध्यम से किया गया। हिन्दू धर्म को भी बॉलीवुड ने विकृत और नकारात्मक प्रस्तुत किया, जो गलत था। सामग्री के प्रस्तुतिकरण में भी बॉलीवुड कभी अपने सुनहरे समय में नहीं रहा। कई फिल्मों में राष्ट्र विरोधी सामग्री ही बतायी गयी है।
मानसिकता को बदलने में फिल्मों की भूमिका
लोगों की मानसिकता को बदलने में भी भारतीय फिल्मों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पारंपरिक गीतों-संगीत को भी फिल्मों में विकृति के साथ ही प्रस्तुत किया गया। बाॅलीवुड फिल्मों ने भारत की संस्कृति, परंपराओं को धक्का पहुंचाया। बॉलीवुड में हमेशा से ही जुगाड़ से काम की परंपरा रही है, जिस कारण से फिल्मों में भाई-भतीजावाद बढ़ा है।


