Judiciary

बलात्कार पीड़िता पर समझौते का दवाब.. आरोपी को एक वर्ष की सश्रम कारावास की सजा

इंदौर(पंकज शर्मा) न्यायालय में बलात्कार पीड़िता के विचाराधीन मामले में पीड़िता को जबरदस्ती राजीनामा करने के लिए दवाब बनाने और छेड़खानी करने के मामले में दोषी पाए जाने पर आरोपी को एक वर्ष सश्रम कारावास की सजा दी गई है।

इस संबंध में इंदौर प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्रक सिंह भदौरिया ने बताया कि न्यायालय,श्रीमती आकांक्षा भटेले न्यायिक मजिस्ट्रेंट प्रथम श्रेणी सांवेर द्वारा क्षिप्रा के प्रकरण क्रमांक 558/2023 में फैसला सुनाते हुए, आरोपी मुकेश चौधरी उम्र 55 वर्ष निवासी सांवेर को धारा 354 क(आई) , 354 (घ), 509,506 भाग 2 में प्रथक प्रथक एक –एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं धारा 294 में 3 माह का सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के साथ ही अर्थदण्ड से दंडित किया है। उक्त प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी दिलीप ताहेड एडीपीओ द्वारा की गयी।

 यह है मामला
अभियोजन के अनुसार मामला- पीडिता ने दिनांक 25 मई 2023 को पुलिस थाना क्षिप्रा में शिकायत करते हुए मामला दर्ज कराया था कि वह खाना बनाने का काम करती है, उसने थाना क्षिप्रा पर मुकेश के खिलाफ पूर्व में दिसम्बर 2021 में बलात्कार की रिपोर्ट लिखवाई थी जिसका केस सांवेर कोर्ट में चल रहा है। इसी बात को लेकर मुकेश रोज रास्ते चलते मुझे परेशान करता है और बोलता है कि केस में समझौता कर ले में तुझसे शादी कर लूगा।

घटना दिनांक 22 मई 2023 के दोपहर 02.00 बजे जब वह घर के बाहर कपडे सुखा रही थी तभी आरोपी उसके घर के सामने अपनी मोटरसायकल से आया और मोटरसायकल उसके घर के सामने खडी करके उसे बुरी तरीके से देखने लगा और उसे आवाज देने लगा ऐसा वह कई बार कर चुका है, आरोपी कभी उसका पीछा करता है और कभी आंख मारना और गंदे -गंदे इशारा करता रहता है और अपशब्द भी बोलता है ।  और कहता है कि केस में राजीनामा नहीं किया तो जान से खत्म कर दूंगा उक्त बाते सुनने में बहुत गंदी लगती है।

पीडिता की उक्त सूचना पर पुलिस ने आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रं 258/2023 अंतर्गत धारा 354, 354 क, 294, 506 भादवि पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया। विवेचना के दौरान फरियादी के न्यायालयीन कथन करवाए गए एवं साक्षियों के कथन लेख किये गये। घटना स्थल का मौका नक्शा तैयार किया गया। आरोपी को गिरफ्तार किया गया और समस्त अनुसंधान उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।जिस पर से आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया है।

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