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चिकित्सा में नैतिक मूल्यों को समझना पहली प्राथमिकता -डॉ. डेनियल सोकोल 

चिकित्सा में नैतिक मूल्यों को समझना पहली प्राथमिकता -डॉ. डेनियल सोकोल 

इंडेक्स मेडिकल कॅालेज में मेडिकल एथिक्स, जीसीपी एवं एनडीसीटी नियमों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

इंदौर। चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता और अनुसंधान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, इंदौर में मेडिकल एथिक्स, गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) एवं एनडीसीटी नियमों पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। मालवांचल यूनिवर्सिटी, इंदौर द्वारा बैरी ट्रस्ट एवं इम्पीरियल कॉलेज लंदन के सहयोग से कार्यशाला आयोजित की गई।इम्पीरियल कॉलेज लंदन से डॉ. डेनियल सोकोल द्वारा मेडिकल एथिक्स विषय पर व्याख्यान दिया गया। डॉ. पूनम पटेल, प्रोफेसर एवं हेड, फार्माकोलॉजी ने डेनियल सोकोल का परिचय बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के लिए पुरस्कार विजेता डॉ. डेनियल सोकोल लंदन (यूके) के एक प्रमुख मेडिकल एथिसिस्ट और प्रैक्टिसिंग बैरिस्टर हैं। पिछले लगभग 20 वर्षों से यूके सहित विभिन्न देशों में डॉक्टरों को मेडिकल एथिक्स की शिक्षा दे रहे हैं। मेडिकल एथिक्स और कानून पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक हैं।इस अवसर पर यूके बैरी ट्रस्ट के हरजीत सिंह बैरी और अभिनित कौर ने बैरी ट्रस्ट से जुड़ी जानकारी दी और विशेष रूप से सेवा भारती से मनजीत संधू उपस्थित रही।

चिकित्सा में संसाधनों का तर्कसंगत समय और परिस्थितियों के अनुरूप उपयोग हो

डॉ. डेनियल सोकोल ने कहा कि “क्वालिटी ऑफ लाइफ” आज के समय में चिकित्सा निर्णयों में बेहद जरूरी होती है। इसमें हमें खासतौर पर मरीज की इच्छाओं की स्वतंत्रता का ध्यान रखना होता है। इसमें भविष्य में मरीज की मानसिक स्थिति, दैनिक जीवन,इलाज के दौरान मरीज को होने वाली कठिनाइयां पर ध्यान देना होगा। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही मरीज के लिए उचित और नैतिक चिकित्सा निर्णय लिए जाने चाहिए। यह पहलू विशेष रूप से नवजात शिशुओं और गंभीर रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा से जुड़े हर व्यक्ति को चाहे वह डॅाक्टर हो या छात्र नैतिक मूल्यों को समझना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसमें मरीज की इच्छा का सम्मान करना बहुत जरूरी है। इसमें खासतौर पर यह ध्यान रखना होगा कि हमारे इलाज से मरीज को किसी तरह की कोई हानि न हो। चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता के साथ न्यायसंगत इलाज आज के समय में जरूरी है।चिकित्सा में संसाधनों का तर्कसंगत समय और परिस्थितियों के अनुरूप उपयोग हो इसका भी ध्यान रखना होगा। इस अवसर पर सभी अतिथियों को मयंक वेलफेयर फाउडेंशन के चेयरमैन सुरेशसिंह भदौरिया, डीन डॅा.संजीव नारंग,रजिस्ट्रार डॅा.लोकेश्वर सिंह जोधाणा,वाइस डीन डॅा रौमी श्रीवास्तव,डॅा.स्वाति प्रशांत,डॅा.जीएस पटेल,सीएओ धीरज जायसवाल ,डॅा.प्रेम न्याती,डॅा.प्रीति परदेशी,डॅा.स्वाति चव्हाण,रचना शर्मा ने स्मृति चिन्ह प्रदान किया।

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