NEWS

समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के सामने स्वयं के अपमान और अनादर को सहन करना सीखें – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.

दलाल बाग में प्रभु पारसनाथ को समर्पित किया गया 351 किलो का निर्वाण लाडू, कत्थक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति के बीच मनाया गया मोक्ष सप्तमी का महापर्व

समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के सामने स्वयं के अपमान और अनादर को सहन करना सीखें – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.

इंदौर। जीवन में स्वयं के अपमान की कीमत पर यदि कोई युद्ध टल रहा हो या किसी समाज अथवा राष्ट्र का भला हो रहा हो तो ऐसा अपमान अवश्य सहन कर लेना चाहिए। अपमान का कड़वा घूँट हर कोई नहीं पी सकता लेकिन जहाँ परिवार और समाज के हित की बात हो वहां प्रभु पारसनाथ जैसे तीर्थंकर के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर हमें भी अपने सम्मान की चिंता और इच्छा को छोड़कर बड़े दिल से निर्णय लेना चाहिए। प्रभु पारसनाथ बनना आसान नहीं है, उन्होंने अपना घोर अपमान सहन कर अपने तप, साधना और त्याग के दम पर 22 तीर्थंकरों को पीछे छोड़कर पहले क्रम पर स्वयं को स्थापित किया। आज उनके निर्वाण दिवस पर हम सबका यही संकल्प होना चाहिए कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के सामने हम स्वयं के अपमान और अनादर को बहुत छोटी घटना मानकर बर्दाश्त करना सीखेंगे।

ये दिव्य और भावपूर्ण विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने बुधवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास के दौरान भगवान पारसनाथ के निर्वाण दिवस पर उपस्थित देशभर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 351 किलो का निर्वाण लाडू समर्पित किया गया जो विदिशा जिले के सिरोंज से बनकर आया था। निर्वाण दिवस का यह उत्सव मोक्ष सप्तमी के रूप में मनाया गया जिसमें देशभर से आए साधकों के कारण समूचा सभा मंडप आज भी खचाखच भरा रहा। प्रवचन के दौरान कई बार जैनम जयति शासनम और गुरुदेव के जयघोष से सभामंडप गूंजता रहा।

धर्मसभा में तीर्थराज सम्मेत शिखर की प्रतिकृति का निर्माण भी किया गया जिसपर भगवान पारसनाथ की स्वर्ण भद्र कूट पर निर्वाण काण्ड पढ़कर उक्त लाडू चढ़ाया गया। प्रथम निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य श्रीमती दीपिका-आकाश जैन कोयला को प्राप्त हुआ। इस परिवार ने राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा. की साक्षी में अमित कासलीवाल, मनीष-सपना गोधा, आनंद-नवीन गोधा, अक्षय कासलीवाल, अशोक डोसी, गिरीश जैन गिन्नी ग्रुप, धर्मेन्द्र जैन सीजेएम एवं दिलीप पाटनी की उपस्थिति में यह पुण्य अर्जित किया। इस समूचे उत्सव में देशभर से आए समाज बंधुओं ने पूरे जोश एवं उत्साह के साथ भाग लिया। भगवान पारसनाथ के पांचों कल्याणक के साथ निर्जल उपवास की साधना करने वाली कन्याओं ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। महिलाओं ने लाडू सजाने की स्पर्धा में भी भाग लिया। कत्थक नृत्य की प्रस्तुतियों ने इस महोत्सव की आभा को कई गुना बढ़ा दिया। संचालन बालब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने किया और आभार माना महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन ने।

चातुर्मास आयोजन समिति के शिवानी-नवीन गोधा, तृप्ति-हर्ष जैन, अंतिका-आनंद गोधा एवं सपना-मनीष गोधा ने बताया कि पर्यूषण महापर्व पर 15 सितम्बर से श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन भी होगा जिसके लिए पंजीयन प्रारम्भ हो गए हैं। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।

 

Shares: