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सच्चा आनंद चाहिए तो भगवान शिव की शरण में ही जाना पड़ेगा – पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री

सच्चा आनंद चाहिए तो भगवान शिव की शरण में ही जाना पड़ेगा – पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री

तिलक नगर क्षेत्र के कृषि विहार उद्यान में शोभा यात्रा के साथ हुआ शिवपुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

 

इंदौर । हम सब जीवनभर अंतिम क्षणों तक यही प्रयास करते हैं कि जीवन में कभी दुख आए ही नहीं। चींटी से लेकर देवता तक यही कामना रखते हैं। संसार का दूसरा नाम दुखालय है। माया दुखों का घर है। ओस के कण चाट लेने से प्यास तृप्त नहीं हो सकती। हीरा खरीदने के लिए सब्जीमंडी नहीं सराफा ही जाना पड़ेगा। सच्चा आनंद चाहिए तो भगवान शिव की शरण में ही जाना पड़ेगा।

तिलक नगर क्षेत्र के कृषि विहार उद्यान स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर पर शिव महापुराण कथा के शुभारंभ सत्र में श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात आचार्य पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा का शुभारंभ मंदिर परिसर में निकली शिवपुराण की शोभायात्रा के साथ हुआ, जिसमें परंपरागत वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों पर थिरकते श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। आयोजन समिति की ओर से पिंटू नामदेव-नीता मिश्रा, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, छत्रपाल सोलंकी, संजय खादीवाला एवं विजय मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिवपुराण का पूजन किया। व्यासपीठ पूजन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। संयोजक पिंटू नामदेव ने बताया कि पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री 25 अगस्त तक यहाँ प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक शिवपुराण कथामृत की वर्षा करेंगे। कथा के दौरान शिवलिंग पूजन विधि, भस्म एवं रूद्राक्ष महिमा, पार्वती जन्मोत्सव, शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म प्रसंग, तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा, जप का महात्यम सहित भगवान शिवाशिव की आराधना से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की संगीतमय व्याख्या होगी। आज कथा में पहले दिन ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा में विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे।

पं. शास्त्री ने कहा कि जैसे जहर या अमृत को धोखे से भी पी लें तो वे अपना असर करेंगे ही, वैसे ही शिव पुराण कथा भी अनचाहे भी श्रवण कर लेंगें तो मनुष्य का कल्याण अवश्य होगा। भगवान आनंदसिंधु हैं जो आनंद ही देते हैं। विडंबना यह है कि हम दुख मिटाने के साधनों में ही अपना सुख ढूंढ़तें हैं। जो आज सुख के साधन हैं, कल वही दुख के कारण बन जाते हैं। जीवन का सच्चा आनंद भौतिक साधनों में नहीं, शिव और पार्वती की सेवा और पूजा-अर्चना में ही मिलेगा।

 

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