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हंसदास मठ पर कृष्ण जन्म, कालिया नाग के मर्दन और उफनती यमुना को पार करने वाली झांकियां देखने देर रात तक उमड़े हजारों श्रद्धालु

हंसदास मठ पर कृष्ण जन्म, कालिया नाग के मर्दन और उफनती यमुना को पार करने वाली झांकियां देखने देर रात तक उमड़े हजारों श्रद्धालु

मठ स्थित सभी देवालयों का हुआ विद्युत एवं पुष्प श्रृंगार- भगवान का हुआ पंचामृत अभिषेक, मध्य रात्रि को हुई जन्मोत्सव आरती

 

इंदौर, । एरोड्रम रोड, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर जन्माष्टमी का महापर्व हंस पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। मठ पर सुबह से आधी रात तक भक्तों का मेला जुटा रहा। कृष्ण जन्म, कालिया नाग के मर्दन और उफनती यमुना को पार करते वसुदेव की झांकी को निहारने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं के समूह डटे रहे।

मठ स्थित भगवान रणछोड़जी का नारायण स्वरूप में श्रृंगार तो दर्शनीय था ही, अन्य आकर्षक झांकियां भी भक्तों को खूब पसंद आई। इनमें मथुरा के कारागार में कृष्ण जन्म और नन्हे बालक को टोकनी में रखकर उफनती यमुना को पार कर रहे वसुदेव की झांकी के साथ ही कालिया नाग के मर्दन, भगवान की रासलीला सहित अन्य मनमोहनी लीलाओं की झांकी भी भक्तों के लिए श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बनी रही। इन सभी झांकियों के दर्शन कल रात से ही प्रारम्भ कर दिए गए थे। फलस्वरूप मठ पर सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही। मठ पर चल रहे मेले में भी हजारों श्रद्धालु सपरिवार पहुंचे और विभिन्न प्रकार के झूलों का आनंद लिया। मठ पर झूले में विराजित लड्डू गोपाल को झुलाने की झांकी भी आकर्षक विद्युत एवं पुष्प सज्जा से श्रृंगारित की गई थी। समूचे मठ परिसर को रंगारंग रोशनी से सजाया गया था।

मठ के पं. अमित दास ने बताया कि रात्रि में जन्म के पूर्व ही भक्तों में खिचड़ी प्रसाद का वितरण शुरू कर दिया गया, इसके बाद भगवान पद्मनाभ स्वरूप शालिग्रामजी का पंचामृत अभिषेक हुआ और रात ठीक 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव की महाआरती के बाद पंजेरी प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। सुबह से मध्य रात्रि तक 50 हजार से अधिक भक्तों ने इन झांकियों का पुण्य लाभ उठाया। इस मौके पर मठ स्थित सभी देवालयों का आकर्षक श्रृंगार भी दर्शनीय बना रहा। मठ स्थित सभी झांकियां शनिवार, 5 सितम्बर को भी भक्तों के दर्शनार्थ खुली रहेगी।

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