रुनझुन रुनझुन म्हारी रनू बाई
केसरिया बालम पधारो म्हारा देश
काल्यो कूद पड़ा मेला में
लोक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां हुई


इंदौर। काल्यो कूद पड़ा मेला में, केसरिया बालम पधारो म्हारे देश जैसे लोकगीतों के बोलों पर अहीर, गोंधल, बिहू, बुंदेलखंडी राजस्थान का कालबेलिया, उड़ीसा का संबलपुरी ,टिपणी, कालबेलिया ,राजस्थानी, उत्तराखंड, निमाड़ का गणगौर, मालवा की मटकी लोक नृत्य करते विभिन्न स्कूलों के बच्चे आज अहिल्या उत्सव समिति द्वारा आयोजित लोक नृत्य प्रतियोगिता में अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे। इसमें मराठी समाज इंदूर की भी सहभागिता रही माई मंगेशकर हॉल सपना संगीता रोड लोहा मंडी पर आयोजित इस प्रतियोगिता में जहां एक राजस्थानी नृत्यो की धूम रही और बुंदेलखंड का अहीर लोक नृत्य का जलवा देखने को मिला तो निमाड़ का गणगौर नृत्य खूबसूरत बन पड़ा था। राजस्थान का कालबेलिया नृत्य में विद्यार्थियों द्वारा दिखाई गई विभिन्न भाव प्रबल मुद्राएं सबको आकर्षित करती रही वही महाराष्ट्रीयन गोंधल लोक नृत्य ने धमाल मचाया ।
गणगौर ने जमाया रंग– प्रतियोगिता प्रमुख सुधीर देड़गे, प्रकाश पारवानी एवं संयोजक प्रशांत बडवे अपर्णा भावे मीनू पोतनीस ने बताया कि कोई केसरिया लहंगा, सफेद कुर्ती तो कोई लाल लहंगा पीली चुन्नी पहन कर आया था किसी के हाथ में लंबी लकड़ी तो किसी के हाथ में फूलों की टोकरी कोई विभिन्न आकृतियों के चित्रों की पोस्टर अपने हाथ में लेकर नृत्य में खड़ा था तो उत्तराखंड के लोक नृत्य में सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया ।वहीं जब निमाड़ का गणगौर प्रारंभ हुआ तो सभी दर्शक निमाड़ से अपने आप को कनेक्ट कर पा रहे थे सर पर गणगौर लेकर नृत्य कर रही बालिकाओं ने खूबसूरती से वहां की परंपराओं को दर्शाया। वही लोक नृत्य में राजस्थान का चरी उड़ीसा का संबलपुरी जिसमें बच्चियों ने सिर पर लकडियों की कलंगिया लगा रखी थी और पांव में जूतियां पहन रखी थी और काफी तालियां बटोरी।
*इन स्कूलों को मिला पुरस्कार –सुनील धर्माधिकारी शिल्पा दिक्षित समीर पांनसे ने बताया कि आज 1 सितंबर को अहिल्या उत्सव समिति द्वारा लोक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें कुल 22 विद्यालयों के 450 से भी अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया । निर्णायक श्रीमती दमयंती भाटिया एवं निवेदिता पांड्या थी। वही प्रतियोगिता में 7 संस्थागत समूह ने भी हिस्सा लिया।
मीडिया प्रभारी नितिन तापड़िया एवं राममूदडा ने बताया कि प्रथम पुरस्कार लोकमान्य विद्या निकेतन अहीर नृत्य द्वितीय एमराल्ड हाईट गोंधल तृतीय पुरस्कार एनी बेसेंट स्कूल के खजूर नृत्य को प्राप्त हुआ वही प्रोत्साहन पुरस्कार भवंस प्रॉमिनेंट एकायाना बाल विनय मंदिर लैसेजेस स्कूल को प्राप्त हुआ वही संस्थागत समूह में मयूरी डांस स्टूडियो को प्रथम एवं युवंशी नृत्य साधना केंद्र एवं नित्य आराधना अकादमी को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुए। कार्यक्रम की शुरुआत मां अहिल्या के पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुई अतिथि के रूप प्रसिद्ध समाजसेवी नरेंद्र फंणसे एवं डॉक्टर प्रमोद नीमा भी शामिल हुए ।इस अवसर पर पूर्व लता बडवे, नवनीत हार्डिया, विशाल क्षीरसागर यश घामौरे मनीषा सुपेकर वैशाली ऊर्ध्वरेवे ,देवेंद्र ईनाणी, मेघा जोशी, मानसी बेहरे, लीना धर्माधिकारी भी मौजूद थी।
इस अवसर पर अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा इतिहास हर देश का हर शहर का होता है लेकिन कोई शहर किसी इतिहास को अपने आचरण में उतारता हुआ बहुत कम दिखाई देता है। इतिहास को जीना बहुत कम शहरों के हिस्से में आया है. इंदौर एक ऐसा शहर है जिसमें अहिल्या उत्सव समिति जैसी संस्थाएं इस स्मृतियों को जीवित रखे हुए हैं और अपने जीवन में संस्कारों में उतार रहे हैं और अगली पीढ़ी को विरासत में दे जा रहे हैं। संचालन शिल्पा दीक्षित ने किया। आभार सचिव सरयू वाघमारे ने माना।


