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धर्म की वास्तविक परीक्षा तभी होगी, जब हमारे सामने गलत करने के पूरे अवसर और सामर्थ्य हों, फिर भी हम सही मार्ग को चुनें-राष्ट्रसंत सुधासागर

धर्म की वास्तविक परीक्षा तभी होगी, जब हमारे सामने गलत करने के पूरे अवसर और सामर्थ्य हों, फिर भी हम सही मार्ग को चुनें-राष्ट्रसंत सुधासागर

दलाल बाग में चल रही चातुर्मास की धर्मसभा में सांगानेर जयपुर से भी आए श्रमण संस्कृति संस्थान के सैकड़ों समाजबंधु

 

इंदौर। जो व्यक्ति हिंसा कर सकता है, फिर भी अहिंसा को चुनता है, जो व्यक्ति क्रोध कर सकता है, फिर भी क्षमा भाव को अपनाता है, जो व्यक्ति अहंकार कर सकता है, फिर भी विनय भाव रखता है-यही वास्तव में सच्चा त्याग कहा जाना चाहिए। ऐसा व्यक्ति ही वास्तव में धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। धर्म की वास्तविक परीक्षा तभी होगी, जब हमारे सामने गलत करने का पूरा अवसर और सामर्थ्य हों, फिर भी हम सही मार्ग को चुनें। आनंद केवल भोजन में नहीं, उपवास में भी है। आनंद केवल गाड़ी में नहीं, पैदल चलने में भी है। आनंद केवल हवेली में नहीं, सादगी में भी है और आनंद केवल धन-दौलत में नहीं, त्याग और संयम में भी है।

संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव की धर्मसभा में उक्त दिव्य और प्रेरक विचार व्यक्त किए। सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने भी राष्ट्रसंत से शुभाशीर्वाद प्राप्त किए। श्रीदिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, जयपुर से आए सैकड़ों समाज बंधुओं ने आगामी 11-12 अक्टूबर को इंदौर में प्रस्तावित श्रमण संस्कृति पाठशाला महाधिवेशन की जानकारी साझा करते हुए राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. से सानिध्य प्रदान करने का निवेदन किया। इस अवसर पर श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड प्रभारी प्रदीप कुमार जैन शास्त्री सहित सैकड़ों समाज बंधुओं ने राष्ट्रसंत से शुभाशीर्वाद प्राप्त किए और अधिवेशन के बैनर्स का लोकार्पण भी किया।

प्रारम्भ में आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा, महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन, मनीष-सपना गोधा एवं आकाश-दीपिका जैन कोयला आदि ने देशभर से आए साधकों की अगवानी की। इस अवसर पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक डोसी, विजय पाटोदी, हुकमचंद जैन काका, संजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, भूपेंद्र भोपाली, सौरभ बडजात्या, संजय पांड्या, मयंक जैन, विकास पाटोदी एवं कमल अग्रवाल सहित अनेक सहयोगी बंधुओं ने सभा की व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। दलाल बाग पर पर्यूषण महापर्व पर 15 सितम्बर से होने वाले श्रावक संस्कार शिविर के प्रति देशभर के साधकों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शिविर की तैयारियों को लेकर प्रतिदिन विभिन्न जैन संगठनों की बैठकों का मैराथन सिलसिला भी चल रहा है। सभा में दिनोंदिन देशभर से आने वाले साधकों का सैलाब उमड़ रहा है। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।

राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. ने कहा कि हमें आत्म मंथन करना चाहिए कि क्या मैं क्रोध कर सकता हूँ फिर भी क्षमा चुनता हूँ, क्या मैं अहंकार कर सकता हूँ फिर भी विनय रखता हूँ, क्या मैं झूठ बोल सकता हूँ फिर भी सत्य का चयन करता हूँ, क्या मैं हिंसा कर सकता हूँ फिर भी अहिंसा चुनता हूँ और क्या मेरे पास भोग करने की सुविधा है फिर भी मैं संयम चुनता हूँ। यही सामर्थ्य से संयम की यात्रा है और यही सच्चे जैन दर्शन की पहचान है। जिसे करने की ताकत नहीं है, उसका त्याग करने का श्रेय नहीं लेना चाहिए लेकिन जिसे करने की पूरी ताकत है, उसे छोड़ेंगे तो वही सच्चा त्याग है, वही संयम और वही धर्म की सच्ची परीक्षा है। धर्म केवल बाहरी क्रियाओं का नाम नहीं बल्कि अपनी इच्छाओं, कषायों और सामर्थ्य को सही दिशा देने का नाम है। भोग के बीच संयम और सामर्थ्य के बीच त्याग ही जीवन को सार्थक बनाता है। दुःख में धर्म करना अच्छी बात है लेकिन सुख और सामर्थ्य के दिनों में धर्म को प्राथमिकता देना ही सच्चे धर्मात्मा की पहचान है।

 

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