इंदौर। (भारती जोशी) । सिमरोल के पास स्थित नर्मदापुरम टाउनशिप में प्लॉट खरीदने वाले 53 से अधिक लोगों ने सार्थक सिंगापुर ग्रुप और उससे जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस कमिश्नर, डीआईजी, एसीपी, सिमरोल थाना, एमआईजी थाना, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध ब्यूरो को शिकायत दी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्लॉट खरीदने के नाम पर उनसे अलग-अलग किश्तों में राशि लेने के बाद अब रजिस्ट्री नहीं कराई जा रही है। शिकायत में षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी, राशि हड़पने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, कंपनी की ओर से सितंबर 2023 में स्काईलाइन रिसॉर्ट में सम्मेलन आयोजित कर लोगों को नर्मदापुरम टाउनशिप में प्लॉट खरीदने के लिए प्रेरित किया गया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टाउनशिप के भविष्य के विकास और निवेश से होने वाले फायदे बताए गए तथा जल्द भुगतान करने पर विभिन्न लाभ और विदेश यात्रा जैसे प्रलोभन दिए गए। इसके बाद कई लोगों ने अलग-अलग प्लॉट बुक कर राशि जमा कराई।
डायरी और रसीदों से राशि लेने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी से जुड़े लोगों द्वारा भुगतान के लिए डायरियां और रसीदें दी गईं। शिकायत में कहा गया है कि कुछ रकम कंपनी के खाते में जमा कराई गई, जबकि कुछ राशि कथित तौर पर कंपनी से जुड़े लोगों और उनके परिचितों के खातों में भी ली गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अधिकांश लोगों ने प्लॉट की पूरी या बड़ी राशि जमा कर दी थी।
रजिस्ट्री के लिए लगातार टालमटोल का आरोप
शिकायत के मुताबिक, कंपनी की ओर से प्रोजेक्ट को वर्ष 2025 तक पूरा करने की बात कही गई थी, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार निर्धारित समय बीतने के बाद भी कॉलोनी का विकास पूरा नहीं हुआ। रजिस्ट्री के लिए संपर्क करने पर कभी प्रोजेक्ट में देरी तो कभी पूरी राशि जमा नहीं होने का हवाला दिया गया। कुछ मामलों में एक से अधिक प्लॉट रखने वाले लोगों से सभी प्लॉटों की पूरी राशि जमा होने के बाद ही रजिस्ट्री कराने की बात कही गई।
मोहित पोपले प्रकरण के बाद बदला मामला
शिकायत में कहा गया है कि 27 जुलाई 2026 को कंपनी से जुड़े बताए गए मोहित पोपले ने फोन बंद कर लिया था। इसके बाद प्लॉटधारकों ने कंपनी पहुंचकर संबंधित लोगों से मुलाकात की। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनके प्लॉट बुक हैं और रजिस्ट्री कराई जाएगी।
बाद में प्रकाशित एक सार्वजनिक सूचना का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं ने कहा कि कंपनी ने मोहित पोपले से संबंध नहीं होने तथा उसके द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से राशि लेने और रसीदें जारी करने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ताओं और कंपनी के बीच विवाद और बढ़ गया।
पुराने भुगतान पर नए भाव में प्लॉट देने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में कंपनी के कुछ लोगों ने पुराने बुकिंग रद्द कर नए भाव पर प्लॉट बेचने की बात कही। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों को कंपनी से जुड़े व्यक्तियों द्वारा अनुबंध और अन्य दस्तावेज दिए गए थे। एक शिकायतकर्ता को कथित तौर पर ऐसी रजिस्ट्री भी दी गई, जिसे शिकायतकर्ताओं ने फर्जी और कूटरचित बताया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि दस्तावेज में नहीं है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब प्लॉटधारकों ने अपने पैसे या रजिस्ट्री के संबंध में कंपनी से जवाब मांगा तो उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। शिकायतकर्ताओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
सरकारी अनुमति से पहले राशि लेने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने जानकारी जुटाने के बाद पाया कि कंपनी ने कुछ राशि कथित तौर पर संबंधित रेरा और अन्य अनुमतियां मिलने से पहले ही प्राप्त कर ली थी। इसके अलावा सरकारी गाइडलाइन से अधिक राशि नकद लेने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत के अंत में सभी आवेदकों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने तथा उनकी राशि और प्लॉट संबंधी हितों की सुरक्षा की मांग की है।


