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यूनिक हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक रिसर्च को लगातार दूसरे साल मिला गोल्ड मेडल, जरूरतमंद बच्चों का नि:शुल्क इलाज बना मिसाल

यूनिक हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक रिसर्च को लगातार दूसरे साल मिला गोल्ड मेडल, जरूरतमंद बच्चों का नि:शुल्क इलाज बना मिसाल

इंदौर। यूनिक हॉस्पिटल, इंदौर में हड्डी एवं जोड़ संबंधी जटिल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के उपचार और चिकित्सा रिसर्च के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को लगातार दूसरे वर्ष राज्य स्तरीय ऑर्थोपेडिक कॉनेफ्रेंस में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2025 में जबलपुर में आयोजित कॉनेफ्रेंस में डॉ. यश गुलाटी को वॉकिंग-एज डीडीएच (डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ द हिप) विषय पर रिसर्च पेपर के लिए गोल्ड मेडल मिला था। वहीं, वर्ष 2026 में ग्वालियर में आयोजित एमपीआईओएसीओएन (MPIOACON) कॉनेफ्रेंस में डॉ. गौरव जैन को वॉकिंग-एज ग्रुप के बच्चों में उपेक्षित क्लबफुट (जन्मजात टेढ़े पैर) के उपचार पर प्रस्तुत रिसर्च पेपर के लिए गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। लगातार दो वर्षों तक मिली यह उपलब्धि अस्पताल की चिकित्सा विशेषज्ञता, रिसर्च और बच्चों के बेहतर उपचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यूनिक हॉस्पिटल में ऐसे कई बच्चों की सर्जरी नि:शुल्क की जाती है, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण जटिल उपचार का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते। वॉकिंग-एज डीडीएच और उपेक्षित क्लबफुट जैसी स्थितियां बच्चों की चलने-फिरने की क्षमता और सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। समय पर उचित उपचार नहीं मिलने पर इन समस्याओं का समाधान और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में अस्पताल द्वारा जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क सर्जरी उपलब्ध कराना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। खास बात यह है कि मरीजों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से किए जा रहे इन उपचारों से जुड़े मेडिकल एक्सपीरियंस राज्य भर के मेडिकल प्लेटफॉर्म्स पर भी सराहना हासिल कर रहे हैं।

अस्पताल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि पिछले वर्ष डॉ. प्रमोद नीमा को चिकित्सा क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान और सेवाओं के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके वर्षों के अनुभव, चिकित्सा के प्रति समर्पण और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान को रेखांकित करता है। एक ओर वरिष्ठ चिकित्सक को उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए सम्मान मिला, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों के रिसर्च कार्यों को लगातार दो वर्षों से गोल्ड मेडल के रूप में पहचान मिलना अस्पताल में अनुभव, अकादमिक उत्कृष्टता और मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय को दर्शाता है।

*यूनिक हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद नीमा ने कहा,* “हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि जिन बच्चों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों के कारण बेहतर इलाज मिलने में परेशानी हो सकती है, उन्हें हम नि:शुल्क सर्जरी के माध्यम से बेहतर जीवन देने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे चिकित्सकों के इसी कार्य को जब अकादमिक स्तर पर पहचान मिलती है, तो यह पूरे अस्पताल की टीम के लिए गर्व का विषय बन जाता है। डॉ. यश गुलाटी को वर्ष 2025 में और डॉ. गौरव जैन को वर्ष 2026 में मिला गोल्ड मेडल हमारे चिकित्सकों की मेहनत, रिसर्च के प्रति गंभीरता और मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। पिछले वर्ष मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी हमारे लिए प्रेरणादायक रहा। हमारा प्रयास रहेगा कि चिकित्सा सेवा और रिसर्च, दोनों क्षेत्रों में गुणवत्ता बनाए रखते हुए जरूरतमंद बच्चों तक बेहतर उपचार पहुंचाया जाए।”

लगातार दूसरे वर्ष मिली इस सफलता पर डॉ. गौरव जैन, डॉ. यश गुलाटी और यूनिक हॉस्पिटल की पूरी टीम को बधाइयां दी गईं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, भविष्य में भी जरूरतमंद मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने, जटिल मामलों में बेहतर चिकित्सकीय समाधान विकसित करने और ऑर्थोपेडिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च एवं अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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