Divinity

17 साल नर्मदा के तट पर की सत्ता की चाकरी, फिर जागी मां की भक्ति

मां नर्मदा के निकट जाना नहीं पड़ता है मां नर्मदा स्वयं अपने भक्तों कों अपने पास बुलाती है मानो मां नर्मदा मां चयन करती है अपने भक्तों का कि कौन मां की सेवा में लगेगा कौन मां की परिक्रम करेगा। मां नर्मदा स्वयं एक जागृत देवी है इस बात का जिक्र मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त गृह सचिव ने भी किया। वह कहते है कि मां नर्मदा के किनारे नौकरी करते- करते कब मां नर्मदा के प्रति आस्था जागृत हो गई पता हि नहीं चला बस मां के प्रति जागी श्रद्धा में संकल्प ले लिया था कि सेवानिवृत्त होते ही मां नर्मदा की परिक्रमा पर निकल जाएंगे। जिसके बाद फरवरी में सेवानिवृत्ति के बाद मां नर्मदा की परिक्रम पर निकल पड़े।

फरवरी में हुए थे सेवानिवृत्त

मध्यप्रदेश शासन में गृह सचिव पद से फरवरी में रिटार्यड हुए ओपी श्रीवास्तव और इनकी पत्नि भारती श्रीवास्तव जो कि शिक्षा विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत्त थी। इन्होने ने भी फरवरी में ही वीआरएस लेकर मां नर्मदा की परिक्रमा पर निकलने का मन बना लिया।

 परिक्रमवासियों के लिए बनाया आश्रम
नर्मदा यात्रा शुरू करने से पहले इन्होने परिक्रमावासियों की सेवा के लिए एक आश्रम नर्मदापुरम में बनवाया। इसके बाद इन्होने अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा नर्मदापुरम से शुरू की है। जिस आश्रम की स्थापना की है उसका नाम है,  ‘देह विदेह आश्रम’  इस आश्रम में इन्होने नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए ठहरने की पूर्ण व्यवस्थाएं की है।

ऐसे जागी मां नर्मदा की भक्ति
इन्होने बताया कि इनकी नियुक्ति पहली बार नर्मदापुरम में 1994 में एसडीएम पद पर नियुक्त हुई। वहीं 1999 में एडीएम बन कर वापस नर्मदापुरम गए। फिर स्थानांतरण के दौरान खंडवा में एनएसडीसी में रहे तो वहां भी नर्मदा जी थी। इसके बाद नगर निगम कमीश्नर बन कर जबलपुर गए वहीं एडिशनल कलेक्टर भी रहे तो वहां भी नर्मदा जी थी। इन्होने नर्मदा जी के तट पर ही 17 साल नौकरी की नर्मदा मां के किनारे नौकरी करते हुए ही श्रद्धा भावना जागृत हुई कि जब भी सेवानिवृत्त होगें तो मां नर्मदा की परिक्रमा पर जाएंगे।

नर्मदा परिक्रमा को लेकर यह है भाव
इनका कहना है कि नर्मदा की परिक्रमा पौराणिक है हर व्यक्ति आत्मकल्याण और आध्यात्मिक प्रगति के लिए नर्मदा परिक्रमा करता है। दुसरा सनातन धर्म के अनुसार चार आश्रम होते है। बह्मचय, गृहस्थ वानप्रस्थ और सन्यास तो हम अब सेवानिवृत्त हो गए है तो हम अब वानप्रस्थ में प्रवेश कर गए अब जरूरी है कि अपने कल्याण लिए भी काम करें और समाजकल्याण के लिए बच्चों को सिखाने के लिए समाज के सपोर्ट के रूप में कार्य करें। इस परिक्रमा के बाद हमने अपने आश्रम में गीता की कक्षाएं शुरू की है। कुछ प्रकाशन शुरू किए है। नर्मदा परिक्रमावासी आते है तो इसी काम में सलग्न रहेगे।

मां नर्मदा को मानते है जागृत देवी
यह तो भगवान की कृपा है कि हम लोग तो शुरू से ही गीता से जुड़े रहे। हमने 2014 में मानसरोवर की यात्रा की और भी विभिन्न यात्राएं की वहीं से भाव पैदा हुआ कि मां नर्मदा जो कि जागृत देवी है उनकी परिक्रमा की जाएं।

यात्रा की शुरूआत में ही ऐसा रहा अनुभव
इनका कहना है कि बड़ा मनमोहक दृश्य है मां नर्मदा का बड़ा आकृषण है। सुखद अनुभूति है और यहां के लोगों में बड़ा सेवाभाव है। यहां के लोगों की मां नर्मदा के प्रति बहुत श्रद्धा है। श्रद्धा भाव है कि परिक्रमावासियों के प्रति भी बड़ा सेवाभाव और श्रद्धा है। नर्मदा के किनारे रहते-रहते वेदान्त के सिंद्धातों को व्यवहार में उपयोग में लाते है। यहां इन्होने कमल फोजदार नामक एक ग्रामवासी का जिक्र करते हुए कहा कि जो कोई और यात्रि थे उनसे बोले की नाति पौते से बाबा शाम सात बजे के बाद बात किया करों मन बड़ा चंचल है दिन भर मन मां में लगाओं ऐसा नहीं कि तुम्हारा मन नाति पौतों और घर में लगा रहे। ऐसे ही मन बड़ा चंचल है मन को निग्रह करों कंट्रोल करो,ये बड़ा आध्यात्मिक सिंदात है। वह सरल भाषा में बता रहे है।

सनातन के लिए लोगों को संदेश
इनका कहना है कि हमारे धर्म का नाम सनातन धर्म नहीं है। हमारा धर्म ही सनातन है। उसकी विशेषता यहा है कि ना तो उसकी किसी ने बनाया है। भगवान राम और कृष्ण भी आए तो उन्होने अपना कोई धर्म नहीं चलाया। धर्म सनातन ही रहा क्योकि यह भगवान का स्वभाव है। गीता में कहते है कि जो ब्रह्म का स्वभाव है वही अध्यात्म है। इसे हमें समझना होगा कि हम लोग जो कई तरह के पाखंडों में डूबे है। हम कई चमत्कारो के पीछे भागते है कि कोई कुछ हमारे लिए कर देंगा। तो सनातन धर्म कहता है कि ‘उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।‘ तुम खुद अपना उद्दार करोंगे तुम खुद अपने पतन के लिए जिम्मेदार हो तो कोई यह कहे कि कोई बाबा ताबिज दे देगा तो रूद्राक्ष दे देगा या कोई गाली गलोज कर देगा तो हमारा उद्धार हो जाएंगा तो ऐसा कुछ नहीं होता ।आपको खुद अपने लिए आध्यात्म में मेहनत करना पड़ेगी     पुरूषार्थ करना पड़ेगा।

Shares:
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *