ओंकारेश्वर ऐसे तो बहुत ही सिद्ध स्थल है जहां भगवान शिव के साथ उनकी पुत्री मां नर्मदा रहती है। मां नर्मदा के चमत्कारी रूप तो सिर्फ साधु संत ही देख पाते है। मां नर्मदा की लीलाओं को समझना आम व्यक्ति की समझ से परे है। मां नर्मदा अपने भक्तो की हर इच्छापुर्ण करती है।
संतो को देती है दर्शन
ओंकारेश्वर में ही निवास करने वाले संत अखिलेश्वरानंद जी महाराज का शनिवार के दिन इंदौर शहर में आगमन हुआ। यह अदभूत अवसर था जब गुरू अपने शिष्यों से मिलने पधारे। संत अखिलेश्वरानंद जी ने पूर्ण वैराग्य का अनुसरण कर रखा है वह सांसारिक लोगों के घर में प्रवेश तक नही करते है। इसके साथ ही संतश्री ने अन्न का त्याग भी कर रखा है। यह ओंकारेश्वर में रह कर नर्मदा परिक्रमावासियों की सेवा में भी लीन रहते है। इन्होने कई बार मां नर्मदा की परिक्रमा की है। मां नर्मदा के दर्शन भी इन्हें होते है। मानों साक्षात मां नर्मदा इनसे चर्चा करती हो। खैर संतो की वाणी और रहस्यों को समझना हम सासांरिक लोगों की सार्मध्य में नहीं है।
मां की होती है विशेष पुजा
मां नर्मदा को वैसे तो शांत स्वरूपा नदी माना जाता है जो सदैव हास्य रूप में दिखाई देती है। मां नर्मदा के दर्शन बहुत ही आकृषक रूप में होते मानों मां भक्तो को अपनी ओर खींच रही हो। वर्षाकाल के दौरान मां नर्मदा का उग्र रूप देखने को मिलता है। औंकारेश्वर के वासी इस बात को अच्छी तरह से जानते है मां नर्मदा जब उफान पर आती है तो मां नर्मदा की विशेष पुजा अर्चना की जाती है इसके बाद मां नर्मदा का उफान कम होता है। ग्रंथो में इस बात का जिक्र मिलता है कि यहां आदिगुरू शंकराचार्य ने भी मां नर्मदा के रोद्र रूप को देखा था कि वह उफान पर आ रही थी जिसे देख कर आदिगुरू शंकराचार्य ने भी मां नर्मदा अष्टक की रचना कर उनका गुणगान किया था इसके बाद मां नर्मदा शांत हो गई और उनका उफान कम हो गया। ऐसे ही हर वर्ष मां नर्मदा का उग्र रूप उफान के रूप में पहाड़ों पर चढ़ता है। ओंकारेश्वर में मां नर्मदा की पुजा अर्चना करके उन्हें चुनरी चढ़ाई जाती है जिसके बाद मां नर्मदा का उफान उतरता है।
भक्त करते है पुजा
ओंकारेश्वर में रहने वाले संत श्री अखिलेश्वरानंद ने एक वृतान्त सुनाते हुए बताया कि उनके द्वारा भी ओंकारेश्वर के पर्वत पर अपनी कुटिया का निर्माण किया गया। लेकिन वहां तक मां नर्मदा का उफान आ गया जैसे ही इन्होने मां नर्मदा की पुजा-अर्चना की मां नर्मदा का उफान कम हो गया और मां नर्मदा वापस शांत स्वरूप में बहने लगी। ऐसे ही संतश्री ने अपने कई अनुभव मां नर्मदा के चमत्कारों को लेकर सुनाए
नीचे से ऊपर की ओर बहती है मां नर्मदा
साइंस की भाषा में द्रव्य पदार्थ का गुण होता है कि वह ढलान की ओर बहता है। इसी परिपेक्ष्य में जल हमेशा नीचे की ओर बहता है भारत की हर नदी का बहान ढलान की ओर है। लेकिन मां नर्मदा अपने उदगम स्थान अमरकंटक में प्रकट होकर, नीचे से ऊपर की और प्रवाहित होती हैं, भारत की हर नदी की तुलना में नर्मदा में जल प्रवाह का वेग अन्य नदियों की तुलना में सबसे अधिक है। जबकि मां नर्मदा ऊपर की ओर बहती है। मां नर्मदा के कई ऐसे गुण है जो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देते है।

इस वर्ष दिखा था अद्भूद दृश्य
इस वर्ष मां नर्मदा जब उफान पर आई थी तो नर्मदा नदी के जल में एक अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहा है। ओंकारेश्वर से निकलने वाले पश्चिमी हिस्से मोरटक्का, बड़वाह, खेड़ी घाट और नावघाटखेड़ी में नर्मदा नदी दो भिन्न स्वरूपों में बहती नज़र आई। नदी के एक छोर का जल मठ-मेला और कीचड़ युक्त दिखाई दिया, जो ऊपरी नालों, नदियों और बहाव से आया हुआ गंदा पानी था। वहीं दूसरी ओर का जल अपेक्षाकृत स्वच्छ और पारदर्शी दिखाई दिया, जो बांध से नियंत्रित प्रवाह के कारण संभव हुआ। यह दृश्य श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए एक अद्वितीय प्राकृतिक अनुभव रहा।


