इंदौर, नर्मदा साहित्य मंथन के दूसरे दिन शनिवार को देशभर से पधारे विद्वानों ने अपनी बात रखी। विश्व संवाद केंद्र, मालवा और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला
इंदौर(विनोद गोयल)। श्रद्धा सुमन सेवा समिति के सदस्यों ने पंचकुइयां रोड, अंतिम चौराहा स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर एवं नटखट हनुमान मंदिर पर नर्मदा जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को मां
अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं अश्वत्थामा। महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक अश्वत्थामा, ये कौरवों व पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे। हनुमानजी आदि आठ अमर लोगों
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ इशिता नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। यह देश में पहला मामला है जब किसी सीएम के
ओंकारेश्वर ऐसे तो बहुत ही सिद्ध स्थल है जहां भगवान शिव के साथ उनकी पुत्री मां नर्मदा रहती है। मां नर्मदा के चमत्कारी रूप तो सिर्फ साधु संत ही देख
मां की गोद में जैसे हर दर्द की दवा होती है वैसे ही मां नर्मदा की गोद में कई औषधियों को भंडार है। नर्मदा के किनारे वनों में कई तरह
मां नर्मदा के उदगम स्थल अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक के घने जंगलों में माँ नर्मदा मंदिर स्थित है इस मंदिर से लगभग 1 किमी दूर बन रहा है रहस्यमयी
माँ नर्मदा जिसे आज के कलयुग लोग आस्था के बावजूद लगातार गंदी करते जा रहे है। मां नर्मदा को जहां एक ओर मां की तरह पूजा जाता है वहीं दूसरी
आदियोगी शिव जो कि हजारों वर्षों तक योग मुद्रा में लीन रहते है। उनके ध्यान को तोड़ना किसी के बस में नहीं है। उस योगनिंदा को तोड़ने के लिए वर्षों
नर्मदा नदी के तट पर अदश्य साधु तपस्य़ा कर रहे है। इसका कोई प्रमाण तो नहीं मिलता क्योंकि यहां पर वे सभी साधु अदश्य रूप में मौजूद है। लेकिन जो











