Eternal Hinduism

जो सुख बैकुंठ में प्राप्त नहीं है उसे प्राप्त करने के लिए भगवान संसार में अवतार लेते हैं

इंदौर(विनोद गोयल) कर्म से ही जीव जन्म लेता है कर्म से ही मृत्यु को प्राप्त होता है नारायण हमारे भगवान है उनकी पूजा करना चाहिए वही संसार के सृष्टि कर्ता है। भगवान से ही हमारी गती है भगवान को जो सुख बैकुंठ में प्राप्त नहीं है उसे प्राप्त करने के लिए भगवान संसार में अवतार लेते हैं भक्तों के प्रेम को पाने के लिए संसार में प्रभु को आना पड़ता है। भक्तों के कष्ट को दूर करने के लिए उनके जीवन को वैभवपूर्ण आसान बनाने के लिए भगवान संसार में जन्म लेते हैं। उपरोक्त विचार आज भागवत कथा के छठवें दिवस पर पाराशर नगर में चल रही भागवत कथा में यतींद्राचार्य जी ने श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किये।
बैकुंठ नाथ ही है वैभव के दाता
उन्होंने कहा संसार में वैभव को प्राप्त करके अहंकारी हो जाता है वह मेरा मेरा करता है लेकिन यह वैभव संसार में भगवान का ही दिया हुआ है बैकुंठ नाथ ही कृपा करके यह वैभव हमको देते है। आज कथा के दौरान श्री पद्मावती वेंकटेश देवस्थानम के अधिष्ठाता परम पूजनीय रामानुजाचार्य स्वामी जी श्री केशवाचार्य जी महाराज बालक स्वामी जी भी मौजूद रहे

उत्सवों का आयोजन बढ़ा देता है आनंद
समिति के भगवान दास हेडा एवं मनोहर सोनी ने बताया कि आज गिरिराज धरण का उत्सव मनाया गया साथ ही 56 भोग उत्सव भी देखने को कथा के दौरान मिला। वही श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सरलाहेड़ जयेश लाठी सचिन महेश्वरी अनुराग तिवारी भी मौजूद थे अंत में व्यास पीठ पर भागवत जी की आरती की गई और गोष्टी प्रसाद का वितरण हुआ

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