Eternal Hinduism

भगवान श्रीराम ने एक गलती करने पर कर दिया था अपने भाई का त्याग, ऐसा था कारण!

रामायण तो सबसे पढ़ी और देखी सुनी है जिसमें राम के भाई लक्ष्मण, भरत का तो काफी जगहों पर उल्लेख किया जाता है लेकिन शत्रुघ्न का कही अधिक उल्लेख नहीं मिलता। क्या जानते आप इसका कारण तो आइए हम आपको बताते है कि कैसे एक गलती करने पर श्रीराम भगवान ने अपने भाई का त्याग कर दिया था

शत्रुघ्न को अपनी भूल कब हुआ अहसास
14 वर्षों के वनवास के बाद जब भगवान राम वापस अयोध्या लौटे तब एक दिन सभा में सभी ऋषियों ने लवणासुर के अत्याचारों के बारे में बताया। जिसे सुनकर भगवान राम ने आश्वासन दिया और सभी से पूछा की लवणासुर का अंत कौन करेगा। इस पर शत्रुघ्न ने कुछ ऐसा कहा की प्रभु श्रीराम ने अपने छोटे भाई को खुद से दूर कर दिया। फिर, अंत में ऐसे हुआ लवणासुर का वध और शत्रुघ्न को अपनी भूल का अहसास…

सभा में शत्रुघ्न से हुई थी यह गलती

श्रीराम ने सारी बात जानकर आश्वासन दिया और सभा में सभी से प्रश्न किया की लवणासुर का वध करने कौन जाएगा, भरत और शत्रुघ्न में से किसे इसकी आज्ञा मिलनी चाहिए। इसके उत्तर में भरत ने कहा की मुझे आज्ञा दें, मैं लवणासुर का अंत करके ही आऊंगा। उसी समय भरत की बात सुनकर शत्रुघ्न अपने आसन से खड़े हो गए और अपने भाई की बात को काटकर लवणासुर का वध करने जाने की बात कही। उस समय शत्रुघ्न को अपनी भूल का अहसास नहीं था कि भरत के लवणासुर का अंत करने की बात को स्वीकार किए जाने के बाद उन्हें उत्तर नहीं देना चाहिए था। उस समय श्रीराम जी ने शत्रुघ्न की बात सुनने के पश्चात उत्तर दिया की ऐसा ही होगा और तुम्हीं लवणासुर का वध करने जाओगे।

प्रभु श्रीराम से हुए दूर हुए शत्रुघ्न
भगवान राम ने कहा कि मैं मधु दैत्य के सुंदर नगर पर तुम्हारा राज्य अभिषेक करूंगा। यदि तुम भरत को कष्ट नहीं देना चाहते है तो उन्हें यहीं रहने दो। तुम विद्वान और शूरवीर हो जो नगर को बसाने के लिए बिल्कुल समर्थ है। लवणासुर का वध करने के लिए तुम्हें धर्म पूर्वक वहां के राज्य का शासन करना होगा। भगवान राम की बात सुनने के बाद शत्रुघ्न को इस बात का अहसास हुआ की उन्होंने अपने भाई भरत की बात काटकर सभा में उत्तर दिया। इसके बाद, शत्रुघ्न ने कहा की बड़े भाई भरत के होते हुए मेरा अभिषेक कैसे हो सकता है। लेकिन आपकी बात को स्वीकार भी अवश्य करना चाहिए क्योंकि इसका उल्लंघन करना घोर पाप होगा। यह बात मैंने वेद-शास्त्रों से जानी है। बड़े भाई भरत के लवणासुर का वध करने की बात को स्वीकार करने के बाद मुझे बीच में उत्तर नहीं देना चाहिए था। मेरे दुरुक्ति के कारण ही यह राज्याभिषेक के रूप में दुर्गति मुझे मिली। अब मैं आपकी आज्ञा अनुसार ही चलूंगा। लवणासुर के वध की बात को भरत द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद भी शत्रुघ्न का उत्तर देना ही इसका कारण है कि भगवान राम को अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को खुद से दूर कर पड़ा।

ऐसे किया शत्रुघ्न ने लवणासुर का अंत
शत्रुघ्न भगवान राम की आज्ञा लेकर लवणासुर का वध करने के लिए निकल गया। उस समय प्रभु राम ने ही लवणासुर का अंत करने की युक्ति शत्रुघ्न को बताई थी और फिर, धन व भारी सेना के साथ शत्रुघ्न को विदा कर दिया। च्यवन ऋषि के आश्रम में शत्रुघ्न ने लवणासुर की दिनचर्या और बल के बारे में सब जाना। इसके पश्चात, जब लवणासुर आहार के लिए वन में निकला तो उसके वापस पहुंचने से पहले ही शत्रुघ्न के नगर द्वार को रोक लिया था। लवणासुर के वापस लौटने के बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ और फिर अंत में शत्रुघ्न ने कानतक धनुष से एक दिव्य बाण उसकी छाती में मारा। कुछ इस प्रकार का लवणासुर का अंत हुआ।

Shares:
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *