माहेश्वरी कुटुम्ब के गरबा महोत्सव में जीवंत हो उठी राजस्थान की
राजपूताना शौर्य गाथा और मारवाड़ी संस्कृति की मनोहारी मर्यादा
गरबा रास महोत्सव में शामिल 800 से अधिक मातृशक्ति की प्रस्तुतियों को हजारों दर्शकों ने निहारा
इंदौर, । स्कीम 71 रिंग रोड स्थित ब्लू लोटस गार्डन पर बीती रात राजस्थान की राजपूताना और मारवाड़ी संस्कृति का अनूठा समन्वय देखने को मिला जब संस्था माहेश्वरी कुटुम्ब की मेजबानी में चल रहे गरबा रास महोत्सव में शामिल 800 से अधिक मातृशक्ति ने अपनी प्रस्तुतियो से हजारों दर्शकों को सम्मोहित बनाए रखा। माँ की आराधना के इस महोत्सव में दिनोंदिन प्रतिभागियों के साथ ही दर्शकों की संख्या भी बढती जा रही है।
महोत्सव संयोजक शारदा-प्रकाश अजमेरा ने बताया कि गुजरात की इवेंट टीम के प्रख्यात प्रशिक्षकों के निर्देशन में चल रहे इस महोत्सव में राजपूताना शौर्य और प्रतिबिम्बित करने वाले गीतों और वाद्य यंत्रों की जोशीली सुर लहरियों ने जहाँ प्रतिभागियों का उत्साह बढाया वहीं हजारों दर्शक भी ताल से ताल और कदम से कदम मिलाकर थिरके बिना नहीं रहे। माता की आराधना के बाद मारवाड़ी परिधान में सजी-धजी मातृशक्ति का अलौकिक सौन्दर्य और उनकी प्रस्तुतियों की भाव भंगिमाएं पूरे समय खचाखच भरे परिसर को बांधे रही। सनातन संस्कृति का देश-विदेश में डंका बजाने वाले भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी एवं पं. मयंक व्यास, भजन गायक भोंपूजी, मप्र वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री अरविन्द बागड़ी, रमेश गुप्ता, पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, पार्षद जीतू राठोर, आशीष गुप्ता, श्रीमती राखी विजयवर्गीय, मनोहर धवन सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों और माहेश्वरी तथा वैश्य समाज के पदाधिकारियों ने भी गरबा स्थल पहुंचकर मातृशक्ति का उत्साहवर्धन किया। अतिथियों का स्वागत संयोजक शारदा प्रकाश अजमेरा, महेश मूंगड, सत्यनारायण बाहेती, मनोज छापरवाल, अजय झंवर, कैलाश जाजू, रुपेश भूतड़ा, श्रीमोहन सोमानी, अशोक इनानी, पुष्प माहेश्वरी, राजेश गट्टानी, गोपाल राठी, मधुसूदन भल्लिका आदि ने किया।
तीन दिवसीय महोत्सव की दूसरी रात पूरी तरह राजपूताना शौर्य और मारवाड़ी संस्कृति के नाम रही जब प्रतिभागियों ने अपनी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से इतना जबरदस्त समां बाँधा कि कुछ देर के लिए ही सही, समूचा गरबा स्थल राजस्थान की रणभूमि जैसा प्रतीत होने लगा। मारवाड़ी परिधान में सोलह श्रृंगार में सजी-धजी मातृशक्ति ने अपनी प्रस्तुतियों से मारवाड़ की मर्यादा और संस्कृति को पूरे जोश और उत्साह के साथ शहर के इस गरबा स्थल पर जीवंत बना दिया। देर रात तक समूचा गरबा स्थल मातृशक्ति के समवेत गरबा गीतों और परम्परागत वाद्य यंत्रों की सुर लहरियों से गुंजायमान बना रहा। महोत्सव की समापन बेला में श्रीकृष्ण रास गरबा की अब तक की सबसे शानदार और प्रभावी प्रस्तुति होगी।
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