पूरण पोली, उकड़ीचे मोदक और गुड़ रोटी ने घोली स्वाद की मिठास
50 से ज्यादा स्टॉल पर सजे मराठी पकवान, लावणी की प्रस्तुति ने बांधा समां; दीपावली की खरीदारी के लिए उमड़े शहरवासी, रविवार को होगा समापन
इंदौर। मराठी संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और खरीदारी के रंगों से सजे एमडीएच प्रेजेंट्स जत्रा में शनिवार को भी इंदौरियों की खूब भीड़ उमड़ी। 50 से ज्यादा स्टॉल पर सजे पारंपरिक मराठी व्यंजनों की खुशबू ने स्वाद प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया। पूरण पोली, उकड़ीचे मोदक, गुड़ रोटी, झुणका भाकर, भाकरवड़ी और सोलकढ़ी जैसे व्यंजनों का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। वहीं, महाराष्ट्र की पारंपरिक लावणी की प्रस्तुति ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग घोले।
संस्था के सुधीर दांडेकर और राजेश शाह ने बताया कि जत्रा के दूसरे दिन शनिवार दोपहर 1:30 बजे से ही शहरवासियों का पहुंचना शुरू हो गया था। शाम होते-होते गांधी हॉल परिसर में लोगों की भीड़ बढ़ती गई। दीपावली की खरीदारी के साथ ही लोगों ने मराठी व्यंजनों का स्वाद लिया। पारंपरिक पकवानों का जायका चखकर कई स्वाद प्रेमियों ने वाह, मजा आ गया कहकर अपनी पसंद जाहिर की।
तृप्ति महाजन और सुमेधा बावकर ने बताया कि जत्रा में दीपावली डेकोरेशन, गृह सज्जा की वस्तुओं, हैंडीक्राफ्ट आइटम, हस्तनिर्मित खाद्य पदार्थों और विशेष रूप से कोंकण क्षेत्र के उत्पादों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। लोगों ने इनकी जमकर खरीदारी की।
दर्शन जागीरदार और नीरज तेलंग ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए गांधी हॉल के मुख्य प्रवेश द्वार से जत्रा परिसर तक निशुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।
जत्रा में इंदौर के साथ आसपास के शहरों और क्षेत्रों से भी लोग पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि कई लोग दोपहर में ही पारंपरिक मराठी व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं। हल्की गुलाबी ठंड के बीच खुले माहौल में खानपान और खरीदारी का आनंद लेते नजर आए। जत्रा ऐसा परीवारिक आयोजन है जिसमे तीनो पीढियां साथ आती है और घर से दरी लेकर आते है मराठी व्यंजन खाते हुए लावणी का आनंद लेते है। तीन दिवसीय जत्रा का समापन रविवार को होगा।
आज के फुड झोन पुरस्कार
निर्णायक – डॉ सोनल पलोड
प्रथम: झुणका भाकर, सुनीता बारगळ
द्वितीय: ओल्या नारळांची करंजी,मनीषा कराले
तृतीय:सोलकढी, मैत्रेयी समूह

