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पालरेचा परिवार द्वारा रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान खजराना गणेश विश्व की सबसे बड़ी सनातनी राखी अर्पित

पालरेचा परिवार द्वारा रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान खजराना गणेश विश्व की सबसे बड़ी सनातनी राखी अर्पित

रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान खजराना गणेश विश्व की सबसे बड़ी सनातनी राखी अर्पित की

बाबा महाकाल, अलिजा सरकार, बड़ा गणपति, छोटा गणेश, चिंतामणि गणपति को अर्पित हुई हाथ से बनी इंदौरी राखी

इंदौर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर इंदौर से राष्ट्रभाव और सनातन संस्कृति का अनूठा संदेश पूरे प्रदेश में गूंजा। मातुश्री पालरेचा परिवार द्वारा तैयार की गई 40×40 इंच की भव्य सनातनी राखी सुबह सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध श्री खजराना गणेश को अर्पित की उज्जैन के बाबा महाकाल को सनातनी राखी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा।

खजराना गणेश मंदिर में पुजारी अशोक भट्ट, पुनीत भट्ट एवं सतपाल महाराज के निर्देशन में विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान गणेश को सनातनी राखी समर्पित की गई। शांतु पुंडरीक पालरेचा के साथ नानेश पलरेचा, शैलेन्द्र गुप्ता भीं मौजूद थे इसके बाद बाबा महाकाल सहित अलिजा सरकार, बड़ा गणपति, चिंतामन गणेश और छोटे गणपति को भी राखी अर्पित की गई।

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर राष्ट्रभाव की थीम

इस वर्ष सनातनी राखी की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और राष्ट्रभाव पर आधारित रही। राखी में राष्ट्रीय चेतना, सनातन संस्कृति और भारतीय गौरव के प्रतीकों को विशेष रूप से उकेरा गया। साथ ही धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी मां वाग्देवी की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के संकल्प को भी प्रमुख स्थान दिया गया।

कमल के स्वरूप में सजा सनातन वैभव

कमल के आकार में तैयार इस भव्य राखी में बाबा महाकाल, भगवान जगन्नाथ, मां महाकाली और मां महालक्ष्मी के स्वरूपों को कलात्मक ढंग से सजाया गया है। राखी के माध्यम से सनातन आस्था, सांस्कृतिक एकता, शक्ति और राष्ट्र की सुख-समृद्धि का संदेश दिया गया।

24 वर्षों से निभा रहा है पालरेचा परिवार यह परंपरा

मातुश्री पालरेचा परिवार के शांतु पुंडरीक पालरेचा, धीरज पालरेचा, जयेश पालरेचा, मितेश पालरेचा और परिवारजन पिछले 24 वर्षों से भगवान को विशेष राखी अर्पित करने की परंपरा निभा रहे हैं। इस वर्ष 40×40 इंच की राखी तैयार करने में करीब ढाई महीने की मेहनत लगी। राखी को सजाने के लिए कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत से विशेष सलमा-सितारे, नग-नगीने, मोती और जरदोजी की सामग्री मंगाई गई।

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