social organizationNEWS

धर्मगुरूओं को करना चाहिए देहदान की महत्ता का वर्णन,”महर्षि दधीचि सम्मान” से सम्मानित हुए 21 देहदानी, 3 देहदानी परिवारों का सम्मान

इंदौर। महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति के द्वारा एम जी एम मेडिकल कॉलेज के सभागार में 21वे देहदान अंगदान दिवस का आयोजन किया गया । इस अवसर पर 21 देहदानी और तीन अंगदानी परिवारों को “महर्षि दधीचि सम्मान” से सम्मानित किया गया । साथ ही १११ बार रक्तदान कर चुके अनिल रांका , एम वाय अस्पताल की नेत्र विभाग की अध्यक्षा डॉक्टर प्रीति रावत तथा महू में देहदान अंगदान अभियान का संचालन कर रहे सत्यनारायण पटेल का भी स्वागत किया गया ।

राज्यमंत्री होकर भी संभाल रहे देहदान का कार्य
समारोह के मुख्य अतिथि थे कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय तथा राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा जो विगत 28 वर्षों से दिल्ली की दधीचि देहदान समिति से जुड़े हुए हैं और स्वयं इस विषय पर समग्रता में ज्ञान एवं अनुभव रखते हैं। वर्तमान में मंत्री हर्ष मल्होत्रा दो मंत्रालयों के राज्यमंत्री होने के दधीचि देहदान समिति दिल्ली के संरक्षक भी हैं ।

देहदान मानवता के लिए बहुत बड़ा काम
मंत्री मल्होत्रा ने धर्म की सही व्याख्या पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दू धर्म में अंगदान की सही विवेचना यदि ऐसे धर्मगुरू करें जिन्हें लोग सुनते हैं, और जिनकी बातों का पालन करते हैं तो आमजन निरर्थक बाधाओं से उबर कर इनके लिए आगे आयेंगे । वे बोले – देहदान अंगदान मानवता के लिए बहुत बड़ा काम है,

पर आश्चर्य ये कि इनकी बात करने पर कोई भी व्यक्ति इससे इनकार नहीं करता है लेकिन जब स्वयं देहदान अंगदान करने की बात आती है तो वह सोच में पड़ जाता है, बहाने बनाने लगता है । इसलिए ये देहदानी अंगदानी परिवार सम्माननीय हैं । देहदान अंगदान के अनेक आयाम है अगर आंकड़ों में जाएंगे तो हमारे देश में प्रति वर्ष लगभग पांच लाख लोगों को अंग की आवश्यकता है। कार्यक्रम के सांसद शंकर लालवानी जी, एम जी एम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया तथा भूतपूर्व डीन डॉक्टर संजय दीक्षित समारोह के अन्य अतिथि के रुप में मौजूद रहे।

80 लाख लोग नेत्रहीनता से पीड़ित
मंत्री हर्ष मल्होत्रा जी ने नेत्रदान के लिए विचार करने का आव्हान करते हुए कहा कि देश में 80 लाख लोग नेत्रहीनता से पीड़ित हैं , और लगभग 8 लाख लोग रोज मृत्यु को प्राप्त कर रहे हैं । यदि मरने वाला प्रत्येक व्यक्ति नेत्रदान करे तो दस दिन में भारत से कॉर्नियल अंधत्व समाप्त हो सकता है ।
श्रीलंका में प्रत्येक व्यक्ति करता है नेत्रदान
एक प्रेरक उदाहरण श्रीलंका का दिया कि श्रीलंका में प्रत्येक व्यक्ति नेत्रदान कर के जाता है और इसीलिए उस देश में एक भी व्यक्ति कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित नहीं है । श्रीलंका जैसा छोटा सा देश पूरे विश्व में नेत्रों का निर्यात करता है । इसके पीछे बौद्ध धर्म की मान्यता है जो कहती है कि अंगदान देहदान में किसी तरह की कोई धार्मिक बाधा नहीं है ।

मन की बात में तीन बार अंगदान का उल्लेख
मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि अंगदान की आवश्यकता और महत्व इसी से स्पष्ट हो जाती है कि माननीय प्रधानमंत्री जी मन की बात में तीन बार अंगदान का उल्लेख कर चुके हैं ।

इंदौर में बढ़ाया जा रहा है अंगदान अभियान
इंदौर में देहदान अंगदान के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं का उल्लेख करते हुए सांसद  शंकर लालवानी ने बताया कि प्रधानमंत्री  के कहने से इंदौर में अंगदान को सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आगामी 3 तारीख से हम अंगदान के लिए एक अभियान आरम्भ कर रहे हैं । इस अभियान के अंतर्गत एक लाख संकल्प पत्र अंगदान के लिए भराए जाने का उद्देश्य है । लालवानी जी ने अंगदान देहदान के लिए सबको आगे आने का अनुरोध करते हुए कहा कि हम किसी को जीवन दे तो नहीं सकते किंतु बचा सकते हैं ।

अंगदान में अग्रणी स्थान प्राप्त कर रहा इंदौर
एम जी एम के डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया ने कहा देश में दक्षिण भारत के कुछ प्रदेश अंगदान के क्षेत्र में काफी उन्नत स्थिति में थे जबकि मध्यप्रदेश का कहीं नाम नहीं था । किंतु स्थानीय प्रशासन के सहयोग और संकल्प से तथा इंदौर के लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से आज इंदौर अंगदान में अग्रणी स्थान प्राप्त कर चुका है । इस क्षेत्र में हमारी उन्नति की गति अद्भुत रही है। आपने बताया कि प्रत्येक दस मेडिकल छात्रों पर एक देह की आवश्यकता होती है , इस तरह ढाई सौ की एक बैच में 25 मृत देहों की अनिवार्यता होती है । इस लक्ष्य को प्राप्त करना महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति जैसी संस्था के बिना संभव नहीं होता है ।

शासन के नियम होंगे देहदान के लिए लागू
डॉक्टर दीक्षित ने उपस्थितजन को बधाई देते हुए बताया कि शासन की ओर से शीघ्र ही ऐसे नियम और बाध्यताएं लागू होने जा रही हैं जिनसे प्रत्येक अस्पताल को वो समस्त प्रक्रियाएं करनी होंगी जिनसे अंगदान की दर प्रभावित होती है । डॉक्टर दीक्षित वर्तमान में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं तथा अरबिंदो अस्पताल से संबद्ध हैं ।

देहदान पर चर्चा भी मुश्किल थी
महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति के संस्थापक अध्यक्ष नंदकिशोर व्यास ने समिति की 21 वर्षों की यात्रा को स्मृति करते हुए बताया कि दो दशक पहले देहदान अंगदान की चर्चा करना सरल नहीं था, लोग इन विषयों की बात भी अशुभ मानते थे और धार्मिक भ्रांतियों तो थीं ही, उनके अलावा प्रक्रियागत कठिनाइयां भी थीं।

साल में 1-2 देहदान भी मुश्किल से थे होते

तब देहदान के लिए स्थानीय थाना क्षेत्र से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता था , कॉलेजों के पास शव वाहन की कमी थी, नगर निगम से देहदानी का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराना भी मुश्किल होता था क्योंकि मेडिकल कॉलेज से संबंधित विभाग से इतर अन्य विभागों को इसकी कोई जानकारी नहीं होती थी । बमुश्किल 2 से 3 देहदान साल भर में हो पाते थे । और अंगदान का तो समाज में नाम तक नहीं था । किंतु जब परोपकार के सकारात्मक विचार ले कर हम आगे बढ़े तो आज 21 साल बाद संस्था में दो हजार से अधिक सदस्य देहदान अंगदान के लिए पंजीकृत हैं । आपने बताया कि सृष्टि के प्रथम देहदानी, त्यागमूर्ति श्री महर्षि दधीचि की देहोत्सर्ग तिथि , जो कि फाल्गुन पूर्णिमा को होती है, को देहदान अंगदान दिवस के रूप में आयोजित कर देहदानी अंगदानी परिवारों को महर्षि दधीचि सम्मान से सम्मानित किया जाता है।

जागरूकता की आवश्यकता
समाज में इन विषयों के प्रति जागरूकता और प्रेरणा के वातावरण का निर्माण ।श्री व्यास ने बताया कि आज के युग में जब हर परिवार के कोई ना कोई सदस्य माइग्रेट हो रहे हैं, कईं बार पंजीकृत सदस्य अन्य शहर या प्रदेश में होते हैं जब कोई अनहोनी घटित हो जाती है । लेकिन तब सोशल मीडिया के कारण इंदौर में रहते हुए भी अन्य स्थानों पर देहदान कराए जाना संभव हो रहा है , प्रदेश के विभिन्न शहरों के अलावा जयपुर, पुणे, कोटा, मुंबई, आदि शहरों में भी दधीचि समिति द्वारा देहदान सम्पन्न कराए गए हैं ।

Shares:
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *