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सिंगल यूज प्लास्टिक को बाय-बाय, महिला शक्ति ने थामी स्वच्छ इंदौर की कमान

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल कायम की। विश्व महिला दिवस के अवसर पर नगर निगम द्वारा प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक को जड़ से समाप्त करने के संकल्प के साथ आयोजित साड़ी वाकेथान ने पूरे शहर को जागरूकता और उत्साह से सराबोर कर दिया।

भव्य साड़ी वाकेथान का शुभारंभ
नेहरू स्टेडियम से प्रारंभ हुई इस भव्य साड़ी वाकेथान का शुभारंभ पुष्यमित्र भार्गव, स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल एवं अपर आयुक्त प्रखर सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर महिलाओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने और दैनिक जीवन में कपड़े के थैले अपनाने की शपथ दिलाई गई।

पर्यावरण संरक्षण के नारों से गूंजा इंदौर
नेहरू स्टेडियम से डेली कॉलेज होते हुए पुनः नेहरू स्टेडियम तक पहुँची यह वाकेथान स्वच्छ इंदौर, प्लास्टिक मुक्त इंदौर और पर्यावरण संरक्षण के नारों से गूंजती रही। साड़ी परिधान में महिलाओं की यह जागरूकता यात्रा शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देती रही। नगर निगम इंदौर एवं दी वर्ल्ड ऑफ फिटनेस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान में 500 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। इस दौरान सफाई मित्र बहनों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी प्रेरणादायी बना दिया।

जनभागीदारी, टीमवर्क ने बनाए रखा है नंबर वन
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जब वे देश के अन्य शहरों में जाते हैं, तो लोग पूछते हैं कि इंदौर स्वच्छता में लगातार शीर्ष पर कैसे बना हुआ है। इसका सीधा उत्तर है । जनभागीदारी, टीमवर्क और महिलाओं की सक्रिय भूमिका। उन्होंने कहा कि इंदौर की महिलाएं न केवल अपने घर, बल्कि अपनी गली और मोहल्ले की स्वच्छता की भी जिम्मेदारी निभाती हैं। गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कर उसे व्यवस्थित रूप से निगम के वाहनों को सौंपना उनकी आदत बन चुका है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुबह से रात तक निर्बाध चलती रहती है।

ट्रिपल R सेंटर और “वेस्ट टू बेस्ट” की अपील
महापौर ने शहरवासियों से आग्रह किया कि वे अपने घरों से निकलने वाले अनुपयोगी सामान को नगर निगम के ट्रिपल आर (Reduce, Reuse, Recycle) सेंटर पर जमा करें और “वेस्ट टू बेस्ट”अभियान से जुड़ें। इससे कचरे में कमी आएगी और संसाधनों का पुनः उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

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