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राम कथा भारत भूमि का ऐसा दस्तावेज, जिसकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं – पं. राहुल

आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास, इंदौर

राम कथा भारत भूमि का ऐसा दस्तावेज, जिसकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं – पं. राहुल

विद्याधाम परिसर में आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में चल रही श्रीराम कथा में सौल्लास मना राम जन्मोत्सव

इंदौर। प्रभु श्रीराम धर्म की शाश्वत मूर्ति हैं। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम इसीलिए कहा गया है कि उनका सम्पूर्ण जीवन चरित्र बेदाग और निर्दोष रहा है। उन्होंने कहीं भी ऐसा कोई आचरण नहीं किया जिससे उनके वंश और भारत भूमि की मर्यादा का हनन हुआ हो। राम के नाम की महिमा तो इतनी है कि आप केवल अपनी जिव्हा पर उनका नाम भी ले आएं या केवल मानसिक स्मरण भी कर लें तो धर्माचरण पूरा हो जाएगा। राम से बड़ा राम का नाम माना गया है। राम कथा भारत भूमि का ऐसा दस्तावेज है, जिसकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं हो सकता। राम और कृष्ण जैसे अवतारों के कारण ही आज सनातन धर्म संस्कृति की ध्वजा पूरी दुनिया में फहरा रही है।

ये प्रेरक विचार हैं आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री के, जो उन्होंने बुधवार को विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में चल रही श्रीराम कथा में राम जन्म प्रसंग की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। न्यास के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि कथा शुभारंभ के पूर्व ह्रदयेश दीक्षित, देवी प्रसाद शर्मा, डॉ. लोकेश जोशी, महेश शर्मा, हेमंत शर्मा, राजकिशोर शर्मा ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्याधाम परिवार की ओर से समाजसेवी सुरेश शाहरा, राजेंद्र महाजन, विभिन्न ब्राह्मण संगठनों की ओर से पं. विकास अवस्थी, पं. अखिलेश शर्मा एवं पं. अजय व्यास, विष्णु व्यास, लोकेश शर्मा आदि ने रामचरित मानस का पूजन किया। कथा में श्रीराम जन्म का दिव्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जैसे ही कथा प्रसंगानुसार राम जन्म की उद्घोषणा हुई, समूचा कथा स्थल प्रभु श्रीराम और जय जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। भक्तों ने नाचते-गाते हुए इस उत्सव का आनंद लिया। प्रकोष्ठ की भारती शर्मा एवं पिंकी शर्मा ने बताया कि विद्याधाम परिसर में श्रीराम कथा का यह दिव्य आयोजन 7 जून तक प्रतिदिन शाम 3.30 से 7.30 बजे तक चलेगा। भागवताचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री नेपाल सहित देश के चारों धाम पर भागवत कथा का दिव्य अनुष्ठान कर चुके है।

आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान का जन्म नहीं अवतरण होता है। राम और कृष्ण के बिना हमारी संस्कृति परिपूर्ण नहीं हो सकती। जिस देश में कंकर भी शंकर बन सकता है, उस देश के संस्कारों पर कभी आंच नहीं आ सकती। भगवान तो भाव के भूखे होते हैं, भोग और प्रभाव के नहीं।

 

 

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