भारत की पवित्र नर्मदा नदी न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लाखों वनवासी समुदायों की जीवनरेखा भी है। इन्हीं वनवासी समुदायों की स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए “नर्मदा समग्र” संस्था ने एक अनूठी पहल की है— “नदी एंबुलेंस”। यह सेवा नर्मदा तटीय दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

स्वास्थ्य सेवा की नई दिशा
मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के सोंढवा तहसील स्थित ग्राम ककराना से संचालित इस नदी एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के सुदूरवर्ती गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना है। यह पहल विशेष रूप से अलीराजपुर, धार, बड़वानी (मध्यप्रदेश), नंदुरबार (महाराष्ट्र), और दाहोद (गुजरात) के वनवासी समुदायों के लिए शुरू की गई है।
टीम संरचना एवं सेवाएं
इस नदी एंबुलेंस टीम में एक डॉक्टर, एक एंबुलेंस सहायक, एक चालक,एक चालक सहायक मौजूद रहती है। इसमें इलाज के लिए प्राथमिक उपचार किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, स्टेचर, आकस्मिक उपचार की निशुल्क दवाइयाँ रहती है। इसके साथ ही गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद 108 एंबुलेंस सेवा की सहायता से निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाता है। इसके अलावा, समय-समय पर स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया जाता है ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।
रेवा सेवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने के लिए ककराना गांव में रेवा सेवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई है। यह केंद्र 10 से 15 किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले वनवासियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान की दिशा में प्रयास
संस्कार केंद्र इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जाती है और उन्हें सरकारी विद्यालयों से जोड़ा जाता है, जिससे वे मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल हो सकें।
सामाजिक सेवा में लगी संस्था
संस्था वस्त्र और राशन का निशुल्क वितरण किया जाता है। पारंपरिक कृषि ज्ञान को संरक्षित रखने के लिए परंपरागत बीज बैंक की स्थापना की गई है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियाली चुनरी अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत “एक घर, एक पौधा” अभियान के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को फलदार पौधे प्रदान किए गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा मिला है।
वनवासी जीवनशैली और परंपराएं
कृषि एवं वन उपज के लिए वनवासी समुदायों की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से वर्षा आधारित है। उनकी प्रमुख फसलें है। मूंगफली, मूंग, उड़द, मक्का, बाजरा, ज्वार की फसल यह लोग लेते है। इसके साथ ही वन उपज में सीताफल, गूगल (खाने योग्य एवं हवन सामग्री हेतु), चारोली,
फलिया (ग्राम समूह) एवं सामाजिक संरचना
वनवासी समाज की विशेष संरचना फलिया प्रणाली पर आधारित है। मुख्य तीन फलिया इस प्रकार हैं:
- पटेल फलिया: गाँव का प्रमुख प्रशासनिक समूह, जिसका नेतृत्व “पटेल” करता है।
- बारती फलिया: विवाह एवं निधन जैसे आयोजनों की जिम्मेदारी निभाने वाला समूह।
- पुजारा फलिया: धार्मिक अनुष्ठानों और विवाह समारोहों का संचालन करने वाला समूह।
विवाह परंपराएं
वनवासी समाज में विवाह समारोह के दौरान पटेल फलिया, बारती फलिया, और पुजारा फलिया की उपस्थिति अनिवार्य होती है। प्रत्येक समूह अपनी विशिष्ट भूमिका निभाकर विवाह को सुचारू रूप से संपन्न कराता है।
कई कार्यो को आगे बढ़ा रही संस्था
“नर्मदा समग्र” की नदी एंबुलेंस और उससे जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं सामाजिक उत्थान कार्यक्रम वनवासी समुदायों के लिए एक प्रेरणादायक पहल हैं। यह परियोजना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचा रही है, बल्कि शिक्षा, आजीविका और सामाजिक समरसता को भी मजबूत कर रही है। इस सेवा के माध्यम से नर्मदा तटीय वनवासी समुदायों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का भी लाभ उठा सकें। “नदी से जीवन, जीवन के लिए नदी—नर्मदा समग्र का यह प्रयास एक नई रोशनी की ओर अग्रसर है।”
यह जानकारी और पोस्ट हमने जबलपुर के मनोज कुशवाह जी से ली है जो आरएसएस से भी जुड़े हुए है।


