सकल बंजारा समाज ने लालबाग से कलेक्टोरेट तक निकाला शांति मार्च, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
सेवागढ़ ट्रस्ट के धर्माधिकारी स्वामी श्रीजी महाराज के आह्वान पर बच्चे और महिलाएं भी हाथों में तख्तियां लेकर हुए शामिल
इंदौर,। सकल बंजारा समाज के तत्वावधान में शुकवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बंजारा समाज के पदाधिकारियों ने सेवागढ़ (आंध्रप्रदेश) स्थित संत श्रीसेवालाल महाराज चैरिटेबल ट्रस्ट के धर्माधिकारी स्वामी श्रीजी महाराज के नेतृत्व में लालबाग मैदान से कलेक्टोरेट स्थित गंजी कंपाउंड तक शांति मार्च एवं रैली का भव्य आयोजन कर एसडीएम को अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन भेंट किया। समाज बंधुओं के इस जुलूस में बच्चे और महिलाएं भी हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाते हुए शामिल हुए। सांसद शंकर लालवानी ने भी लालबाग पहुंचकर समाज बंधुओं को आश्वस्त किया कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक इन सभी मांगों को पहुंचाकर उनसे भी तत्काल मांगे पूरी करने का आग्रह करेंगे।
सकल बंजारा समाज की ओर से समाज के दो दर्जन से अधिक सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण से नारे लगाते हुए लालबाग से गंजी कंपाउंड मैदान तक शांति मार्च निकाला। समाज की ओर से मोहन राठौड़, कमल बडतिया, बबलू राठौड़, अजय मूड, नेमीचंद नायक, प्रताप राठौड, ममराज पंवार, पवन राणावत, भीम सिंह राठौड़, कालूराम ठेकेदार, हरिसिंह चौहान, कनीराम राठौड़, प्रकाश मानावत आदि ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया और समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि लम्बे समय से अपना समाज सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ा बना हुआ है। मातृशक्ति का नेतृत्व बबीता बाई राठौड़, सुशीला नायर, पूनी राठौड़, सीमा राठौड़ एवं जशोदा राठौड़ ने किया। वर्तमान में प्रदेश में समाज को पिछड़ा वर्ग एवं विमुक्त तथा घुमक्कड़ जाति के अंतर्गत रखा गया है। दक्षिण भारत के राज्यों में बंजारा समाज को अधिक सुविधाएँ मिल रही हैं इसलिए धर्माधिकारी के आह्वान पर समूचा बाजार समाज आज यहाँ एकत्र हुआ है।
उन्होंने एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में आठ सूत्रीय मांगे की हैं। इनमें समाज को संवैधानिक आरक्षण देने, समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर बढाने, राजनीति में सहभागिता बढाने, आरक्षण के माध्यम से सामाजिक आर्थिक विकास का लाभ देने, विमुक्त और घुमक्कड़ जातियों के लिए विशेष प्रावधान करने, समाज के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार और भेदभाव को समाप्त करने तथा बंजारा समाज के इतिहास एवं शूरवीरों की गाथाओं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसी मांगे शामिल हैं। समाज के प्रवक्ता मोहन राठौड़ ने कहा कि यह केवल शक्ति प्रदर्शन था। यदि समय रहते मांगे नहीं मानी गईं तो समूचा बंजारा समाज सड़क पर उतरकर बड़े आन्दोलन के लिए बाध्य होगा।

