earth

Eternal Hinduism

धरा एवं प्रकृति का संरक्षण है आवश्यक- युवराज स्वामी श्री यतींद्राचार्य जी

हम इस धरा का केवल शोषण करते हैं दोहन करते हैं अत्याचार करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए खेती करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए अनाज खाते हैं
Narmada

‘नर्मदा सरितां वरा’ धरती के सात मील अंदर तक बहती है मां नर्मदा

मां नर्मदा नदीं के कई रहस्य है जिन्हें कोई नहीं जान पाया। मां नर्मदा की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। नर्मदा नदी को समस्त तत्वों की