इंदौर(विनोद गोयल) हमारे धर्मग्रंथ सुषुप्त समाज को जागृत एवं चैतन्य बनाते हैं। मनुष्य का जीवन हमें केवल पशुओं की तरह व्यवहार करने के लिए नहीं, बल्कि सदभाव, परमार्थ और
भगवान शिव, जो समय (काल) और मृत्यु (काल) के भी स्वामी हैं, यानी वे समय और मृत्यु से परे हैं और उनका कोई अंत नहीं; वह स्वयं समय को नियंत्रित



