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Eternal Hinduism

धरा एवं प्रकृति का संरक्षण है आवश्यक- युवराज स्वामी श्री यतींद्राचार्य जी

हम इस धरा का केवल शोषण करते हैं दोहन करते हैं अत्याचार करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए खेती करते हैं हम अपने स्वार्थ के लिए अनाज खाते हैं
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भारत का अर्थ केवल भूगोल नही, अपितु स्वभाव है – सरसंघचालक मोहन भागवत

इंदौर(पंकज शर्मा) सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नही, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहाँ चैरिटी नही, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें,